भीम भागीरथी जैसे
भीम भागीरथी जैसे,शौर्य बल खान वाले,
किसी के खुशी के लिए,हारना सीखाता है।
दुखियों के दुख हर,अप ना मानव धर्म,
प्यासे को पानी दे जान,डालना सीखाता है।
संस्कार का है खेल, सुधर्म से रखे मेल,
हाथ जोड़के सम्मान, करना सीखाता है।
जिन मन कुविचार, वैसा ही दे संस्कार,
विद्रोही बना पत्थर, मारना सीखाता है।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
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