कतका कन पिये हे मंदहा ह
कतका कन पिये हे मंदहा भुइयां म परे हे।
करलई हे दाऊ कुकुर मन चाटे बर धरे हे।
खाये बर पइसा नही काहय हाथ होगे सुन्ना।
खुलगे भट्ठी ह त दरूहा मन ल होगे गुन्ना।
काला बेचिस कहाले लाइस बाई ह रोवत हे।
मस्त मतंगा नशा होगे जिहा तिहा सोवत हे।
कोरोना के नइहे डर डट्टा म लाइन लगे हे।
बिहनिया के गेहे भट्ठी परान ऊहे तजे हे।
वाह रे चतुर सरकार तोर महिमा हे अपार।
मंदिर के पट बंद हे इहा भट्ठी म लगे दरबार।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, कबीरधाम(छ.ग.)
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