मोर धरती हे पावन भुंइया
मोर धरती हे पावन भुइंया...-एला माथ नवाहू।
भारत भुइयां के रक्षा खातिर मै बलिदान हो जाहूं।
जनम धरिन इहे गौतम गांधी,अवंतिका लक्ष्मी रानी ह।
इही धरती के सेवा करिन हे, राम कृष्ण महाज्ञानी ह ।
इही धरती के सेवा करे बर-2 फेर जनम ले आहूँ..
मोर मयारु मोर पिरोही, दिल म धिरज तै आस रख।
सपना हमर सब पुरा होही, मोर ऊपर बिसवास रख।
देश धरम के फरज निभाके-2 मांग सिंदूर मोर सजाहू..
देश के खातिर जूझगे इहे अवंतिका वो वीरांगना।
अडिग अचल लड़गे रन म बैरी मारे कई गुना।
उतरगे रन म नारी ह त-2 होथे का बताहूँ...
उठा तलवार खलबली मचाइस रानी लक्ष्मीबाई ऐ।
हवय मिशाल नारी मन बर आज जन जन बढ़ाई हे।
ऊही नारी शक्ति ल जगाके-2 दुनिया ल देखाहू..
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग.)
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