प्रिया प्रकाश,रश्के कमर

समसामयिक प्रिया प्रकाश पर हास्य रचना...
कुछ नही भैया आँखी के जादू चलाये हे।
जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे।

प्रिया मारत आँखी त कमईया
काम ल घलो भुलत हे।
शिल्पा मारिस आँखी त रामदेव 
के एक आँखी नई खुलत हे।
स्कूल, काँलेज, रद्दा बाट ल गारा कस मताये हे,
        जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे।

       (जय गंगान)
तोर नैना म काये जादू हे,
लाईका सियान बेकाबू हे,
                       प्रिया प्रकाश

वाह रे आँखी वाले टुरी
नैना ले सबला मारे छुरी
                      प्रिया प्रकाश

रूप घलो तोर चिक्कट हे
नखरा ह तोर बिक्कट हे
                         प्रिया प्रकाश

        (तेरे रश्के कमर)
छाये चारो डहर, तोर चर्चा हर डगर,
काहा ले आये टुरी कोनो न ई जानय ओ

इतरावत रथस मटमटावत रथस
आँखी मारके दिवाना बनाथस तै ओ
 
कुकुर भुकये नही,मांछी झुमये नही,
जब आँखी तोर खराब हो जाही ओ        

छाये चारो डहर, तोर चर्चा हर डगर,
काहा ले आये टुरी कोनो न ई जानय ओ

             *पवन नेताम "श्रीबासु"*
 सिल्हाटी, स./लोहारा, कबीरधाम
          मोबा. -9098766347

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