कृष्ण जन्म पर

बाल रूप प्रभु जनम लियो तब,देवन सब दुंदुभि बजावै।
अंजुलि भर भर फूलन बरसा, गंधर्व सब नाच देखावै।
नंद यशोदा के आंगन ठाड़े,नाचत मंगल गान को गावै।
झलकै सुंदर गौर शरीर मुख मंडल देख मन को अति भावै।
श्यामल कोमल हांसत पुलकत,मोहत मोहन नाम धरावै।
बाल रूप बाल लीला करत,नटखट बन उत्पात मचावै।
बाल तन पोतना को मारय तो,अघासुर को मार गिरावै।
लीलाधारी लीला करत अनेक है,लीला देख पवन छंद सुनावैं।

पवन नेताम 'श्रीबासु'

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