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दिन कटता न रात कटती

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रात कटती है न तो दिन कटता है। यादे नही हटती न तस्वीर हटता है। सुबह से उठता तो तेरी याद है सताता। क्या करू कैसे  कही मन नहीं भाता। सिसक सिसक कहे दिल बेचारा मुझसे, विरह मे यारो मेरा सांस थमता हैं..                                   रात कटती.... अच्छा नही लगता ये मौसम ये जामाना। सजनी के बिना साजन का क्या ठिकाना। जाओ री कोयलिया संदेश दो प्रीतम को, तिल-तिल मेरा अब उमर घटता है..                                  रात कटती.... रात कटती है न तो दिन कटता है। यादे नही हटती न तस्वीर हटता है।            पवन नेताम 'श्रीबासु'       सिल्हाटी, कबीरधाम (छ.ग.)               07/01/2020

चुनाव के परिणाम

11 दिसंबर 2018 चुनाव घोषणा, लगातार  15 वर्षों तक भाजपा की सरकार के बाद  काग्रेंस सरकार बनने साथ ही जब शराब  की ठेका भाजपा सरकार चला रही थी तब  शराब ने क्या किया इस पर एक व्यंग रचना.. --------------------– शराब पीने से इंसान बदल जाता है। शराबी घर का महौल बदल जाता है। पर आज शराब ने नया ट्रैक पकड़ा है। अपनी व्यापार से सरकार को बदला है। योजना बनेगी अब नई सरकार का तगड़ा। चल रही योजनाओं मे  होगा अब लफड़ा। जनता को पड़ी है नौकरी,बोनस,व्यापार की। मुफ्त मे मिल जाये सब, ऐसे सरकार की। जागरूक जनता है अब बर्बाद नही होगा।  एक ही सरकार का  अब राज  नही होगा। देखते है राम मंदिर बनाने मे कितना जोर होगा। वर्षों से चल रही है  फैसले का  क्या तोड़ होगा।                   पवन नेताम 'श्रीबासु'      सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम @ यह रचना किसी पार्टी विशेष पर नही है  अन्यथा न लेवें।

कतका कन पिये हे मंदहा ह

कतका कन पिये हे मंदहा भुइयां म परे हे। करलई हे दाऊ  कुकुर मन चाटे बर धरे हे। खाये बर पइसा नही काहय हाथ होगे सुन्ना। खुलगे  भट्ठी ह त  दरूहा मन  ल होगे गुन्ना। काला बेचिस कहाले लाइस बाई ह रोवत हे। मस्त मतंगा नशा होगे जिहा तिहा सोवत हे। कोरोना के  नइहे डर  डट्टा म लाइन लगे हे। बिहनिया  के  गेहे भट्ठी  परान ऊहे  तजे हे। वाह रे चतुर सरकार  तोर महिमा हे अपार। मंदिर के पट बंद हे इहा भट्ठी म लगे दरबार।              पवन नेताम 'श्रीबासु'          सिल्हाटी, कबीरधाम(छ.ग.)

भीम भागीरथी जैसे

भीम भागीरथी जैसे,शौर्य बल खान वाले, किसी के खुशी के लिए,हारना सीखाता है। दुखियों के दुख हर,अप ना मानव धर्म, प्यासे को पानी दे जान,डालना सीखाता है। संस्कार का है खेल, सुधर्म से रखे मेल, हाथ जोड़के सम्मान, करना सीखाता है। जिन मन कुविचार, वैसा ही दे संस्कार, विद्रोही बना पत्थर, मारना सीखाता है। पवन नेताम 'श्रीबासु'

बेटी बचाओ

             -–------गीत---------- बेटी खुशियों की होती छांव..भैया बेटी बचाओ बेटी बचाओ भैया बेटी बचाओ-2  बेटी अंगना.... बेटी के बिना जग अंधियारा, सूना होगा ये जग सारा। गर बेटे को तुम चाहते हो, बेटी को तो क्यों मारते हो। बिना बेटी के बेटा कहा पाओ, देखोगे सूनी कलाई, बिन बहना के राखी न भाई। बेटा कलप कलप रोएगा, रक्षाबंधन मे न सोएगा। तीजा-पोला को कैसे मनाओ, बन गये कही कन्यादानी, नाम तुम्हारे सद्ग्रन्थ बखानी। नवरात मे किसको जिमाओगे, नवकन्या ढूंढ न पाओगे। चाहिए लक्ष्मी तो बेटी घर लाओ...                 पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छग)

ये इल्तिजा है मेरा मुस्कुरा दीजिए

इल्तिजा है मेराsssमुस्कुरा दीजिए।-4 हो गई दिल बीमार, दवा दीजिए। तुम खड़ी दूर हो मै खड़ा दूर हूँ। फासलें दूरियों का मिटा दीजिए। जिन्दगी कुछ घड़ी अब थम सी गई। प्रेम के मीठे शब्द अब सुना दीजिए। लग न जाये किसी की नजर आपको, खाली दिल है खुद को,छुपा लीजिए। चाहने वाले दुनिया मे मुझे बहुत है, जल्द नाम मेरा लबो पे सजा लीजिए। बहुत कराये इंतजार उमर अठरा की, अब हाथो मे मेंहदी लगा लीजिए। पवन नेताम 'श्रीबासु' 2019

वक्त बेवक्त इशारा न कर

वक़्त बेवक़्त छत से इशारा न कर । हो  चुके हैं  पराये  पुकारा  न कर । सूरज तेरे दीदार मे नही निकलेगा,  बेवफा चेहरा अब सवारा न कर। जिन्दगी हो गई किसी और के नाम, मेरे इंतज़ार मे समय गुजारा न कर। खत्म हो गई महफिल अब हमारी, मुद्दत की बातों को किनारा न कर। लौट जा लहरें अपनी समंदर वापस, साहिल की इबादत  दुबारा न कर। धर्म की होड़ ने तबाह कर दी एकता, बाँटकर इसे हमारा-तुम्हारा न कर। पुराने घरों मे दरवाजे गले मिलते थे, अब अकेले दरवाजे से गुजारा न कर।          पवन नेताम 'श्रीबासु'   सिल्हाटी, कबीरधाम (छग) 💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕

अमरनाथ की कथा

क्‍या है अमरनाथ की कथा क्यों जो भी इस अमर कथा को सुन लेता वह अमर हो जाता है  पुराणों में संस्मरण है कि एक बार मां पार्वती ने बड़ी उत्सुकता के साथ बाबा श्री विश्र्वनाथ देवाधिदेव महादेव से यह प्रश्न किया कि ऐसा क्यूं होता है कि आप अजर अमर हैं और मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर फिर से वर्षो की कठोर तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना होता है। जब मुझे आपको ही प्राप्त करना है तो फिर मेरी यह तपस्या क्यूं? मेरी इतनी कठोर परीक्षा क्यूं? और आपके कंठ में पड़ी यह परमुण्ड माता तथा आपके अमर होने का कारण व रहस्य क्या है? महाकाल ने पहले तो माता को यह गूढ़ रहस्य बताना उचित नहीं समझा परन्तु माता की स्त्री हठ के आगे उनकी एक न चली। तब अन्त्वोगत्व्या महादेव शिव को मां पार्वती को अपनी साधना की अमर कथा, जिसे हम अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं, इसी परम पावन अमरनाथ की गुफा में कही। भगवान शंकर ने मां पार्वती जी से एकान्त व गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनने को कहा, जिससे कि अमर कथा को कोई भी जीव, व्यक्ति और यहां तक कोई पशु-पक्षी न सुन लें, क्योंकि जो कोई भी इस अमर कथा को सुन लेता, वह अमर हो जाता। इस कारण शिव ...

जिनगी हे मया बिन सूना

जिनगी हे मया बिन सूना..-2 मया म सुख हे, मया म दुख हे-2 जिनगी मया बिन गुना... जादू भरे नयना म काजर अंजाये.... धवल करेजवा म तीर चलाये हिरदे पान म लगा ए चूना.... मयारू के बोली हिरदे म समाये.. महुवा झरे हासी मन हुलस जाये। मया म जिनगी के खुशी हे दूना... पवन नेताम 'श्रीबासु' 2018

वाह रे गद्दारों

वाह रे गद्दारो जिसने तुझे अपना दूध पिलाया था। नन्हे हाथ पकड़कर जिसने चलना तुझे सिखाया था।। ऐसी ममतामयी माँ के उपकारों को तू भूल गया। गद्दारी और मक्कारी के फंदे पे तू है झूल गया।। जिसने पैदा किया है तुझको उस पर ही गुर्राता है। कैसा नाकारा है तू जो बाप को आँख दिखाता है।। जनम से सीधे है पर अब टेढ़ा होकर दिखलायेंगे। भगतसिंह की भाषा में अब तुमको हम सिखलाएँगे।। याद करो सन् संतावन के उठे क्रांति उन ज्वालों को। दुश्मन का मुँह तोड़ने वाले उन भारत के लालों को।। जीभ पकड़कर तेरी हलक से बाहर हम खींच सकते है। शांतिवादी है किंतु स्वाभिमान पर मुठ्ठी भी भींच सकते है।। अगर रहे औकात में तो हम जीभरकर तुझे दुलारेंगे। लेकिन फिर भी न सुधरे तो तेरे सीनेे मे तिरंगा गाड़ेंंगे।।                   पवन नेताम 'श्रीबासु'        सूर साहित्य समिति कबीरधाम (छग) भ्रमण भाष- 9098766347 , 8770679568 अणु डाक-pawannetam7@gmail.com अंतरताना-pawannetam.blogspot.com 

मृत्यु भोज

आज मेरे मित्र के घर मृतक भोज मे जाकर जो दुख हुआ और समाज की रीत पर जो विचार आया वह विचारणीय पंक्तियाँ प्रेषित है अपना विचार जरूर देवें.... किसी के माथ की बिंदिया लूटी, लूटी सिंदूर की लाली। नाक से लूट गई साज की नथनी,लूटी कान की बाली। अंतस की दुखड़ा को उनके,थोड़ा सा तू सोच, उनके घर बैठकर तुम, क्या करोगे मृत्यु भोज। किसी के सर पे हाथ न रहा,किसी के अब नाथ न रहा। कन्यादान दान करने को अब वो पिता का साथ न रहा। लालन-पालन जिम्मेदारियो का माँ पर हो गई बोझ, उनके घर बैठकर तुम, क्या करोगे मृत्यु भोज। बूढ़ी माँ बैठ आंगन मे पुत्र शोक मे बिलख रही। मै जीवित बेटे न रहा आत्मा उनकी कलप रही। बहती दुखड़ा की नीर धारा,उन आँखो को बस पोछ, उनके घर बैठकर तुम, क्या करोगे मृत्यु भोज। दुख मे जिमाये जात न भोजन,परिजन की पंगत लगवाये। ये कैसी समाजिक रीति पवन,पंगत बैठ जीभ आनंद पाये। कुरीति को त्यागो बन्धुओं,जो सु-रीति हो वह खोज, उनके घर बैठकर तुम, क्या करोगे मृत्यु भोज।          पवन नेताम 'श्रीबासु'     सिल्हाटी, कबीरधाम(छ.ग.) ...2020

इश्क हुई पर खता हो गया

इश्क हुई तुमको पर एक खता हो गया। तुुुमने देेेखा मुझे यूं फना हो गया। मैने माना तुम्हें आशिकी हो गई, पर तब कहा तूने जब मेरा विवाह हो गया। कितनी सिद्दत से तू जो मुझे चाहती। जब मिलू तो कितनी तू दीदारती। मैने देखा है आज आसूं ढोते हुए, क्या करे पवन तुझसे जुदा हो गया।                         पवन नेताम 'श्रीबासु'

कृष्ण जन्म पर

बाल रूप प्रभु जनम लियो तब,देवन सब दुंदुभि बजावै। अंजुलि भर भर फूलन बरसा, गंधर्व सब नाच देखावै। नंद यशोदा के आंगन ठाड़े,नाचत मंगल गान को गावै। झलकै सुंदर गौर शरीर मुख मंडल देख मन को अति भावै। श्यामल कोमल हांसत पुलकत,मोहत मोहन नाम धरावै। बाल रूप बाल लीला करत,नटखट बन उत्पात मचावै। बाल तन पोतना को मारय तो,अघासुर को मार गिरावै। लीलाधारी लीला करत अनेक है,लीला देख पवन छंद सुनावैं। पवन नेताम 'श्रीबासु'

भोले जी के सजत हे बरात

भोले जी सजत हे बरात , सजावय भूत पिशाच, 'के देवता सब हासय रे..'-2 के देवता सब हासय रे,-2  कैलाश म..-2 भीड़ लगे हे अपार,भूत परेत दिखय झार,  के देवता सब.. काने म पहिरावय बिच्छू के बाला,नर मुंडन के पहिरै माला। चुपरे हावय अंगे भभुतिया, कनिहा पहिरै मृगन के छाला। जनेऊ बने हे..-2 गौहा डोमी साँप, दुजे के चंदा चमके माथ के देवता सब हासय रे.. बिना मुड़ी के भुतवा राजा, गदकावत हे गुदुम बाजा। चटिया मटिया टिमकी दफड़ा, कहा पाबे भैया उहा झगड़ा। सौरा भौरा ह..-2 सातो राग मिलाये, परेतवा देवय ताल बजाये, के दुम दुमी बाजा बाजय रे.. रक्सीन टुरी गाना गावय, झिथरी परेतिन नाच दिखावय। किसम किसम के नाच गाना, बुढ़वा नंदी के गोड़ थिरकाना। घुघवा देवता..-2 पइसा ल उड़ाये, उछल मंगल सब मनाये के देवता सब हासय रे-2                             पवन नेताम 'श्रीबासु'           सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम                 दिनांक- 21/01/2018

दीये तेरी अजब कहानी

दीये तेरी भी अजब कहानी है। तेरी जीवन तेल की मेहरबानी है। बस तेल के रहते करते रोशन, तेल  साथ खतम जिन्दगानी है। तेरी रोशनी से होते जग रौशन, दीवाली  तुझसे ही मनानी है। तू औरन के घर कर उजियाले, अंधियारे मे जीवन बितानी है।       पवन नेताम "श्रीबासु"   सिल्हाटी, कबीरधाम (छग.)

स्वच्छता अभियान नारा

शौचालय म शौच जाबो। साफ सफई ल अपनाबो। घर म शौचालय बनवाना हे। बीमारी ले मुक्ति पाना हे। कचरादान म डालव कचरा। घर ल बनाव साफ सुथरा। हरियर ताजा साग सब्जी खाहू। अपन शरीर ल स्वस्थ्य बनाहू। साफ सफई अऊ करव जतन। सुघ्घर घर अऊ सुघ्घर तन। घर म कचरा झन बगराव। बीमार ले मुक्ति पाव। साफ सफई म सब धरव धियान। स्वस्थ्य परिवार के इही पहिचान। साफ सफई बर जात न पात। सोला आना गियान के बात। घर दुकान म एक कचरादान। करव जतन अऊ बनव महान। चल समारू सब ल समझाबो। साफ सफई के बात गोठियाबो। स्वच्छता म धियान धराना हे। बीमारी ले छुटकारा पाना हे। कहा जाबो समारू नदियां तरिया। घर म शौचालय नाहनी बढ़िया। घर म शौचालय जब बनही। तब सब हमला बढ़िया कही। गंदा पानी के गढ्ढा ल पाट। मच्छर ले पावव निजात। पवन नेताम 'श्रीबासु'

खूं के आंसू रूलाया न कर

खूं के आँसू मुझको रूलाया न कर। इस तरह मुझको याद आया न कर। सामने मेरे डोली तेरी उठने लगी, इस तरह अर्थी मेरी उठाया न कर! जमाने से दाश्ता हमारी मिट जायेगी, इस तरह ऐसे खत को जलाया न कर! राह मे तेरी  फूल हम बिछाते रहे, तू कांटे बिछाकर बुलाया न कर! दर्दे गम की तू मुझको दरिया दे गई, इस तरह तड़पा मुस्कुराया न कर! बेखुदी की सारी हद खुद पार कर गई, बेवफा कहके मुझको बुलाया न कर।              पवन नेताम 'श्रीबासु'    सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)           संपर्क- 8770679568

दाऊ मंदराजी

आज नाचा गम्मत के पुरखा स्व. श्री दाऊ,मंदराजी के जनम दिन म नाचा के तर्ज म समर्पित ओला गीत.. छ.ग. के नांदगांव मे...-2जनम धरिन मनखे खाटी ऐ, इही पुरखा इही थाती ऐ -4 (1) नांदगांव के गांव रवेली, ओखर जनम अस्थाने। गांव के एक किसनहा बेटा ह बनाइस अलग पहिचाने। -नाचा गम्मत के जनम करिन ऐ-2कतका सुघर परिपाटी ऐ, इही पुरखा इही थाती ऐ.... -रहिस नामे दुलार आवय गौटिया परिवार,     1 अप्रेल 1911 के वो जनमिस ओहा यार।      रामाधीन के ओ बेटा - मंदराजी ऐ न      नाचा गम्मत के पुरखा- मंदराजी ऐ न       ओ तबलची चिकरहा- मंदराजी ऐ न       मनोरंजन करैया - मंदराजी ऐ न - गांव-गांव बगराईस नाचा गम्मत देखाइस,     जन-जन म सुघर संदेश पहुचाईस।     पोंगवा पंडित के रचाईया- मंदराजी ऐ न     इरानी गम्मत बनाईया- मंदराजी ऐ न      मरारिन गम्मत देखईया-मंदराजी ऐ न       संदेश बगरैया- मंदराजी ऐ न अई होsssss सुरता करव वो पुरखा ल sssss सुरता करव वो पुरखा ल सुरता करव दीदी ओ नाचा के पुरखा ल सुरता करव न। - गम्मत के...

तुलसी बिहाव के बरनन

आज के पर्व म तुलसी बिहाव बिधि के बरनन अंगना म चऊक पुराके, गन्ना के मड़वा छवाके। तुलसी महरानी ल..आसन देवव बईठाव....                                         आसन देवव बईठाव। अंगना के तुलसी ल, सुघ्घर सिंगारव, लुगरा  कपड़ा पहिराके,दुल्हिन बनाव, -टिकली अऊ फुंदरी ले..माला अऊ मुंदरी ले, दाई ल देवव सजाव..दाई ल देवव सजाव। देव हमर सालिक राम, ऊहूल धर लावव, मौरे मुकुट पहिराके, दूल्हा बना..वव। - सुघ्घर धोती पहिराके..दूल्हा बरोबर सजाके, मड़वा म लावव बईठाव..मड़वा म लावव बईठाव। तुलसी अऊ सालिक ल, मड़वा  म बईठावव, बिही चना भाजी अन-धन, दाई म चढ़ावव। -लुगरा अऊ कपड़ा ल..आनी-बानी जोरन सबला, दाई बर जोरन जोरव..दाई बर जोरन जोरव। गौरी गनेश मढ़ावव, धूप दिया पूजा थाली लावव, पूजा बिधि-बिधान ले,दोनो के बिहाव करावव। -कुवारी धागा ल घुमाके..जोड़ी संग गाठ बंधाके, मड़वा म सात भांवर घुमव..मड़वा म सात भांवर घुमव। दोनो के बिहाव कराके, शुभ आशीर्वाद लेके, छिटका घलो सब तापव..दोस कलेस दूर करव।           ...

मोर धरती हे पावन भुंइया

मोर धरती हे पावन भुइंया...-एला माथ नवाहू। भारत भुइयां के रक्षा खातिर मै बलिदान हो जाहूं।                    जनम धरिन इहे गौतम गांधी,अवंतिका लक्ष्मी रानी ह। इही धरती के सेवा करिन हे, राम कृष्ण महाज्ञानी ह । इही धरती के सेवा करे बर-2 फेर जनम ले आहूँ..                     मोर मयारु मोर पिरोही, दिल म धिरज तै आस रख। सपना हमर सब पुरा होही, मोर ऊपर बिसवास रख। देश धरम के फरज निभाके-2 मांग सिंदूर मोर सजाहू.. देश के खातिर जूझगे इहे अवंतिका वो वीरांगना। अडिग अचल लड़गे रन म बैरी मारे कई गुना। उतरगे रन म नारी ह त-2 होथे का बताहूँ... उठा तलवार खलबली मचाइस रानी लक्ष्मीबाई ऐ। हवय मिशाल नारी मन बर आज जन जन बढ़ाई हे। ऊही नारी शक्ति ल जगाके-2 दुनिया ल देखाहू..                       पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग.)

छत्तीसगढ़िया रे किसान

गुरुवार, 14 जुलाई 2016 पागा कलगी-13/38/पवन नेताम 'श्रीबासु' विसय - माटी के मितान --------------------------------------------------------- छत्तीसगढ़िया रे किसान, हमर माटी के मितान।। खेती करव रे किसान, हमर भुईंया के भगवान।। धरव नांगर धरव तुतारी, खेत डाहर जावव। धरती दाई ल रिझा के, हरियर लुगरा पहिरावव।। धरौ मन म धियान, तुमन हरव ग सुजान, छत्तीसगढ़िया रे किसान........ आनी बानी पेड़ लगाव, हमर माटी ल सुंदरावव। आक्सीजन ल बुलाके,परदूसन ल भगावव।। चलौ करव रे श्रमदान,तभे मिलही रे बरदान छत्तीसगढ़िया रे किसान........ विदेशी खातू छोड़के, सवदेशी ल अपनावव। माटी ह बिमार होवतहे,ईलाज ल करावव। बढ़िया उगही जावा धान,आहि नवा रे बिहान छत्तीसगढ़िया रे किसान.......... तुहर किसानी करे ले भैया,जग संसार ह पाथे। तुहरे ल खाके नेता, अऊ तोही ल गुरराथे। देखावव अपन स्वाभिमान, बाढ़ही तुहर सम्मान छत्तीसगढ़िया रे किसान........ हमर माटी के मितान......... --------------------------------------------------------- रचना - पवन नेताम 'श्रीबासु' ग्राम - सिल्हाटी स/लोहारा जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी बचाव उदिम...

वो जादू चला रही है

---------गीत-------------          वो जादू ....चला रही है..     मुझको दीवाना बना रही है-2 सुर्ख होंठो मे लाली तेरे कजरारे नैन। माथे बिंदिया चमकती सुलझी है बैन। ~गोरे गालो पे तिल, कहर ढा रही है, ~मुझको दीवाना बना रही है-2 हरी चुड़ियाँ हाथो पे जब खनकतीं है। रिझाती मेरे मन को ऐसे धुन बजती है। ~चाल हिरनी जैसे चला रही है, ~मुझको दीवाना बना रही है-2 काली नागन सी झुलती तेरे लंबे बाल। ले गगरी कमरिया पे लचकती चाल। ~वो हाथो पे रंग हिना चढ़ा रही है ~मुझको दीवाना बना रही है-2                      पवन नेताम 'श्रीबासु'  सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग.)                   संपर्क-9098766347

जरा अब मान जाओ

-------गीत----------- करना हमको तुमसे प्यार... तुम्हीं हो मेरी दिलबर यार,                              जरा अब मान जाओ-2 @@@@@@@@@@@@ कहा जाओगी सुन मेरी ज़ान, ये दुनिया हो गई है बेईमान। लगी तुम्हें उमर है अठरा बरस की, बिजुरिया गिरेगी गरज गरज की। आ अपनी प्यार का कर इजहार.... तुम्हीं हो मेरी दिलबर यार,                              जरा अब मान जाओ-2  ######################                  जो चलती हिरनी की है चाल, झुलाके काली नागन  बाल। है ज़ालिम नैन तेरे कजरारे, करेजवा को चीर कटार है मारे। कि लग गई इश्क़ की मुझको बुख़ार.. तुम्हीं हो मेरी दिलबर यार,                              जरा अब मान जाओ-2 ******************************** बसे मेरे होंठो पे तेरा ही नाम, नजर मे रहती सुबह से शाम। सपना सकार  हो  जाने दे., लक्ष...

अऊ आबे जगजननी हो मैया

अऊ आबे जग जननी हो मैया अऊ आबे जग जननी। अहो दया मया तै राखे रहिबे दया मयाsss हो ओ..माँ..अंबे माँ हो माँ दुर्गे माँ अहो दया मया तै राखे रहिबे तै ह ओ दया करणी हो मैया तै हा ओ दया करणी                            अऊ आबे.... अहो माटी माटी म तोला सिरजाके प्रान प्रतिष्ठा कराएन। हम भगत सब मिलके दाई तोर बर कुंदरा बनाएन। हम दुखियारा तोर चरन म, तार लेबे भव तरिणी हो मैया अहो सुत उठ के बड़े बिहनिया सेवा तोर बजायेव। अहो फूलपान गंगा दूबी लाके आरती तोर सजायेव। नर नारी मन संझा बिहनिया-2 आरती जय जय करनी हो मैया सेऊक मन तोर गुन ल दाई सुमर सुमर नित गावय। अलिन गलिन ले देवी बरूवा मन झूमर झूमर के आवय। तोला रिझाये बर मोर महतारी,गूंगूड़ धूप संग बंदनी मैया... अऊ आबे जग जननी हो मैया...                   पवन नेताम 'श्रीबासु'           सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)

शनि देव

दुख-सुख के संगवारी ए जी, शनिदेव के महिमा भारी हे जी।। शनिदेव के महिमा भारी हे जी-2 कष्ट हरन अवतारी ए जी शनिदेव के महिमा... (1)दुख आये त एखर शरण म आवव,ब्रह्म मुहूर्त शनिदेव ल मनावव। सरसो के तेल शनिदेव ल नहवावव,गुड़ अऊ तिल के लड्डू चढ़ावव। दुखिया के पालनहारी जी-2 (2) बांझन मन इही डेहरी म आथे,दुखियारिन शनिदेव ल गोहराथे। बिधि बिधान पूजा कर मनाथे,शनिदेवता के फेर आशीष ल पाथे। लईका के सुन किलकारी ए जी-2 (3) शनिदेवता ल अशुभ झन मानव,मुक्ति देवइया देवता एला जानव। सतकर्मी ह सुख फल पाथे, कुकर्मी ल शनि दण्ड दे जाथे। न्यायालय के दण्डाधिकारी ए जी-2  शनिदेव के महिमा भारी हे जी...                पवन नेताम 'श्रीबासु'

खुद के अंदर अब इंसान कहा रखते है

                  गज़ल खुद के अंदर अब इंसान कहा रखतें है। इंसानियत के वो ईमान कहां रखतें  है। वृद्धाश्रम मे रोते छोड़ आते  है माँ-बाप, अब घरो मे पुराना समान कहा रखतें है। फिजूल की वाहवाही रखती है दुनिया, अब सच्चाई की जुबान कहाँ रखतें है। अच्छे दिन का इंतजार कितनो को है, अच्छे संस्कार का ज्ञान कहाँ रखतें है। आजकल कितने मकां बनते है शहर मे, प्रेम वाली वो रोशनदान कहाँ रखते है। उम्र गुजर गई इस शहर मे बसर करतें, सफेद बालो की पहचान कहाँ रखतें है।                    पवन नेताम 'श्रीबासु'               सिल्हाटी, कबीरधाम छ.ग.

बदरिया रे

बदरिया रे..बदरिया रे... जरा खोज के लादव रे मोर सँवरिया -2 बदरिया रे ..... चंदा ल पुछेव,चकोर ले पुछेव, प्रेम विभोर नाचत मंजुरे ल पूछेव। -कोनो मोर देखेव जहुरियाँ रे..बदररिया रे.. अमवा म कोयली ह कुहू कुहू बोलय चकवा अऊ चकवी बस प्रेम हो झूलय।  मोर पिरोही ल संदेश दे बिजुरिया रे..बदररिया रे               पवन नेताम 'श्रीबासु'      सिल्हाटी, कबीरधाम (छ.ग.)                  04/02/2018

माँ अंगा ले लो आरती

माँ अंगा ले लो आरती हो माँss माँ अंगा ले लो आरती हो माँ। पहली आरती भवानी जी के नंदन -2 कालीनांग नाथये, कृष्ण मुरारी, आरती करत है जनकपुर झूरहूर भागबड़े, उजियार करो मैया की जय देव, की जय जानकी माता -2 निस दिन गावत मैया जी को निस दिन ध्यावत मैया जी को अंबा सुन माता की जय देव।

विष्णु सक्सेना

प्यास बुझ जाये तो शबनम खरीद सकता हूँ। जख्म मिल जाये तो मरहम खरीद सकता हूँ। ये मानता हू मै दौलत नही कमा पाया, मगर तुम्हारा हर एक गम खरीद सकता हूँ। सोचता था मै तुम गिर के सम्हल जाओगे। रौशनी बनके अंधेरों को निगल जाओगे। न तो मौसम थे न हालात न तारिख न दिन किसे पता था कि तुम ऐसे बदल जाओगे। तू जो ख्वाबों मे भी आ जाये तो मेला कर दे। गम के मरूथल मे भी बरसात का रेला कर दे। याद वो है ही नही आये जोतन्हाई मे, तेरी याद आये तो मेले मे भी अकेला कर दे। जब भी कहते हो आप हमसे कि अब चलते है। हमारी आँख से आंसू नही सम्हलते है। अब न कहना कि संग दिल कभी नही रोते, जितने दरिया है पहाड़ो से ही निकलते है। मेरा मुक्तक मेरे लहजे मे गालियां होगा। दर्द उसने मेरी तरह दबा लिया होगा। उसकी तलखी मे हुआ कैसे तरन्नुम पैदा, उसने गुस्से मे मेरा खत चबा लिया होगा। हमे कुछ पता नहीं है हम क्यों बहक रहे है। राते सुलग रही है दिन भी दहक रहे है। जब है तुमको देखा बस इतना जानते है, तुम भी महक रही हो हम भी महक रहे है। बरसात भी नही पर बादल गरज रहे है। सुलझी हुई है जुल्फें और हम उलझ रहे है। मदमस्त एक भँवरा क्या चाहता कली से तुम भी समझ रहे ...

पहली होली के दुख

...........पहली होली के दुख........... करेव बिहाव कुवारा दुख जान के, सुवारी लायेव दाई-ददा के बात मान के। त का होगे, अरे का जादू डार दिए सुरता भुलावत नइ हे.. मइके चलदिस सुवारी ह आवत नइ हे। नाचत लाये रेहेव बाजा अऊ डोली म, भेजे ल परगे समारू पहली होली म। अंगना ल करके चलदिस जी सुन्ना, भीतरे भीतर होगे संगी मोला गुन्ना। त का होवत हे, अरे रतिहा कन दसना मोला भावत नइ हे मइके चलदिस सुवारी ह आवत नइ हे। हँस्ती सूरत ह मोर खोइला कस चपट गे, होली मोर बर संगी गिरहा बन झपट गे। दौड़े दौड़े सुर ह ओखरे डाहर जावय, न नींद आवय रतिहा न दिन ह पहावय। त दाई कहाये, ऐ रोगहा टुरा एको कौरा खावत नइ हे... मइके चलदिस सुवारी ह आवत नइ हे। मिरगिन कस रेंगना,कोयली कस हे बोली, घेरी-बेरी सुरता आवय संगी हाँसी ठिठोली। सुवा पाखी लुगरा मोंगरा खोपा म लगावय, रूप सुन्दरी निकलय त चंदा घलो लजावय। त का दशा हे, गोसइन के मया ल पवन अभी पावत नइ हे.. मइके चलदिस सुवारी ह आवत नइ हे।                  पवन नेताम "श्रीबासु"          सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम       ...

एक मंच म दू भैया के गान

एक मंच म दू भैया के गान  लाफ्टर शो इखर पहिचान                             जय गंगान। सरसती मैया के मिले हे बरदान, मधुर मधुर इन छेड़थे तान,                              जय गंगान। पहिनावा बड़ सुन्दर हे, दिखे म इन गोल्लर हे,                            जय गंगान। अनूप भैया जब छेड़य तान, तबला के ताल घलो बाजय आन,                              जय गंगान। कौशल भैया के गुरतुर बोली , सुपा दता के भर ले झोली,                              जय गंगान।  कतका ले इखर करव बखान  अड़हा अज्ञानी पवन नेताम,                             जय गंगान।         ...

तोर गुरतुर गोठियाना

तोर गुरतुर गोठियाना,मन ल ओ मोर भाना। सुन्दराई ल का काहव मै ओ... -2 नैन कजल तोर कारी, होंठ के तोर लाली। सुरूज जोत ले चमकय,काने के तोर बाली। नैना के तीर चलाना, अँखियाके तोर बुलाना सुन्दराई ल का काहव मै ओ..... -2 नाक म चुक ले नथनी,गला म मोतियन हार। हरियर रंग के लुगरा,पहिरे हे कंधियन डार।। तोर मुच ले ओ मुसकाना..आदत हे बचकाना सुन्दराई ल का काहव मै ओ.....-2 लाली रंग के टिकली,चिटिक अंजोरी कस। चढ़ती हे जवानी, मऊहा के झरय रस। कनिहा के तोर लचकाना, गगरी धरके तोर जाना सुन्दराई ल का काहव मै ओ...... -2 चंदा कस मोहनी चेहरा,चंदैनी चमकय दात। सरग सुन्दरी खड़े लगय,लगय पूनिमा रात। तोर चुरी के खनकाना,छुईमुई कस लजाना सुन्दराई ल का काहव मै ओ......-2                     पवन नेताम 'श्रीबासु'              सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम                 संपर्क- 9098766347      @सर्वाधिकार सुरक्षित......…........

मै बुलाऊंगा तुझको आना होगा

मै बुलाऊंगा तुझको तो आना होगा। प्रेम के मीठे गीत फिर गाना होगा। बेवफाई के कितने जखम है भरे, अपने दिल के दर्द सुनाना होगा। हो गई अरसे अब रूसवाई छोड़ दो, फिर कभी रूठना और मनाना होगा।    अब तलक दुनिया ए सताती रही, प्रेम के खिलाड़ी से मात खाना होगा। हम अपने है अपनो से मिलकर रहे जो छोड़ जायेंगे वो बेगाना होगा।       पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी. स/लोहारा कबीरधाम

प्रिया प्रकाश,रश्के कमर

समसामयिक प्रिया प्रकाश पर हास्य रचना... कुछ नही भैया आँखी के जादू चलाये हे। जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे। प्रिया मारत आँखी त कमईया काम ल घलो भुलत हे। शिल्पा मारिस आँखी त रामदेव  के एक आँखी नई खुलत हे। स्कूल, काँलेज, रद्दा बाट ल गारा कस मताये हे,         जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे।        (जय गंगान) तोर नैना म काये जादू हे, लाईका सियान बेकाबू हे,                        प्रिया प्रकाश वाह रे आँखी वाले टुरी नैना ले सबला मारे छुरी                       प्रिया प्रकाश रूप घलो तोर चिक्कट हे नखरा ह तोर बिक्कट हे                          प्रिया प्रकाश         (तेरे रश्के कमर) छाये चारो डहर, तोर चर्चा हर डगर, काहा ले आये टुरी कोनो न ई जानय ओ इतरावत रथस मटमटावत रथस आँखी मारके दिवाना बनाथस तै ओ   कुकुर भुकये नही,मांछी झुमये नही, जब आँखी...

हिरण के चक्कर

हिरण हिरण हिरण, ऐ हिरण के चक्कर काहे यार। सबो डहर चलत हे ओखरे बयार। सोना के बनके राम ल लंका घुमादिस। काला हिरण बनके सलमान ल जेल भेजवा दिस। सलमान ल इतना तो समझना चाहिए- जब जब कोई महिला के हाथ होथे। तब तब सफलता/असफलता साथ होथे। नीलम तब्बू सोनाली सलमान ल उकसाईस। बेचारी हिरण के छाती म गोली चलाईस। एक बात सत हे, होना तो उही गत हे। अहमदाबाद ले होईस जब नारी के अपमान। पहुचिस जोधपुर, खतम होगे सम्मान। फेर करिस नारी के अपमान । पाईस उही जोधपुर म अस्थान। कृपया अन्यथा न लेवे।                        पवन नेताम 'श्रीबासु'                सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम

कोहिनूर हो जायेगा

🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸 मेंहनत करते रहो एक दिन नाम हो जाएगा। मनचाहा तुझको हासिल मुकाम हो जाएगा। रंजिश भरी इस जमाने मे घुल न जाना तुम, आग सी फैलती बाते है बदनाम हो जाएगा। तिमिर चिर रौशन कर जमी को रवि बनकर, बदल दे आलम खुशनुमा अंजाम हो जाएगा। तमन्ना ए ता उम्र आसमां मे उड़ने का रक्ख, ए हौसले दुनियाको सबब पैगाम हो जाएगा। खुवाईश तेरी नीलामी की मोल रखते है जो, उनकी हर जमीर खुद  नीलाम हो जाएगा। रख यकीं अपने हौसले पे वफा ही करेंगे'पवन', तू सोना -चाँदी कोहिनूर के दाम हो जाएगा।                   *पवन नेताम 'श्रीबासु'*            *सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम*

देने वाला जब भी देथे छप्पर फाड़ के

देने वाला जब भी देथे कहिथे छपर फाड़ के। फेर हमला काबर बनाये गरीब बेकार के । कोन जनम के बदला ले गरीब पैदा करेस तै। अच्छा बनावत-2 मूर्ति ल बिगाड़ डरेस तै। न चऊर न दार न खेत न खार के.... छिन के हमर हासी ल कहिथस रोवव झन। दुख के बीजहा  देके कहिथस बोवव झन। पापी पेट बर कुछू नही जियव कहिथस मार के...  हमर कोनो पता न हावय कोनो ठिकाना । दुख म कलहरत हन मुरलीधर अब आना। दुख ल रोवत बुलावत हन गोहार के...             पवन नेताम 'श्रीबासु'    सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम           मोबा.- 9098766347                                                        

तुम अगर साथ दो तो सम्हाल जाऊंगा

मुझे रह रह के तेरा मुस्कुराना याद आता है। वो नजरो से तेरा प्यार जाताना याद आता है। जो पूनम भी, तुझे देखे, तो वो शरमा जाये, वो चेहरे से तेरा जुल्फ़ हटाना याद आया है। तुम अगर साथ दो तो,सम्हल जाऊँगा। मुश्किलों के भँवर से निकल जाऊँगा। जिंदगी के सफर में है,फिसलन बहुत थाम लो हाथ वरना फिसल जाऊँगा। मैं समंदर हूँ गर,तुम हो लहरे मेरी, मैं गजल हूँ अगर,तुम हो बहरें मेरी।। मैं बदन हूँ वो जिसका,तुम्ही रूह हो साथ छोड़ोगे गर,तो मैं मर जाऊँगा!! धोखे खाकर सदा ही,मैं रोता रहा पीकर आँसू सदा ,प्रेम बोंता रहा पीर सहकर मेरा दिल है पत्थर हुआ प्यार पाकर तुम्हारा, पिघल जाऊँगा! मुद्दतो से थी रूठी,ये मुस्कान है जाने गुम थी ,कहां मेरी पहचान है हाथ थामा है गर,तो ये वादा रहा मैं वो मौसम नही जो बदल जाऊँगा। अ          पवन नेताम 'श्रीबासु'      सिल्हाटी, कबीरधाम(छ.ग.)        संपर्क-8770679568

वक्त बेवक्त इशारा न कर

वक़्त बेवक़्त छत से इशारा न कर । हो  चुके हैं  पराये  पुकारा  न कर । सुरज तेरे दीदार मे नही निकलेगा,  बेवफा चेहरा अब सवारा न कर। जिन्दगी हो गई किसी और के नाम, मेरे इंतज़ार मे समय गुजारा न कर। खत्म हो गई महफिल अब हमारी, मुद्दत की बातो को किनारा न कर। लौट जा लहरें अपनी समंदर वापस, साहिल की इबादत  दुबारा न कर। धर्म की होड़ ने तबाह कर दी एकता, बाँटकर इसे हमारा-तुम्हारा न कर। पुराने घरो मे दरवाजे गले मिलते थे, अब अकेले दरवाजे से गुजारा न कर।          पवन नेताम 'श्रीबासु'   सिल्हाटी, कबीरधाम (छग) 💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕 

नहका दे केवट हमला

            छत्तीसगढ़ी गीत *'नहका दे केंवट हमला गंगा के पार'* मातृ-पितृ भक्त,मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी पिता दशथ द्वारा कैकयी को दिये वचनानुसार चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार,भाई लक्ष्मण एवं पत्नी सीता के आग्रह पर उन्हे भी साथ लेकर जाते है। राह मे गंगा नदी आती है जिन्हें पार करने हेतु गुहा नामक केंवट से गंगा  नदी पार करने आग्रह करते है। श्रीराम जी एवं केंवट के रहस्यमयी शर्त के बीच संवाद को इस गीत मे पिरोने  का प्रयास किया गया है। नहका दे केंवट हमला गंगा के पार।। गंगा के पार केंवट -2 पहुंचा दे केंवट हमला गंगा के पार।।                   (1) चउदा बरस हमला ए राज छोड़ जाना, समय झन बीताना पार जल्दी पहुंचाना। केंवट कहय प्रभु  मरम तोर मै जाना, पाँव धुर्रा परय त पथरा नारी बन जाना। जादू भरे पांव तोर लीला हे अपार...                   (2)  कठवा के नांव कहू मोर नारी बन जाही, रोजी रोटी बंद, परिवार भूखे मर जाही। एक बेर तोर कहूं चरन ह धोवा जाही, किरिया हे केंवट तुम ल नांव...

हे राम दाता राम

                  हे राम... हे राम दाता राम ..हे राम विधाता राम। हे राजाराम दयालु सुन लो न तु मेरी पुकार, मै अभागा इस दुनिया मे चरण मे ले के तार। हे राम.. न मै ज्ञानी पंडित हूँ प्रभु  , न मुझमे चतुराई। न मै पूजा पाठ को जानू, मुझमे सारी बुराई। करू वर्णन जग तेरो महिमा-2 दे विद्या भण्डार.. सुना हूँ तेरी चरण कि प्रभु जी, महिमा है आपार। शरणागत  को लेते   शरण मे,  करते  बेड़ा  पार। वही चरनन की दास बनालो-2 कर दो भव से तार..                    पवन नेताम 'श्रीबासु'     सिल्हाटी, स.लोहारा, कबीरधाम(छ.ग.)                      {12/08/2018}

कइसन जमाना आगे

              कलजुगिया झपागे देखव देखव संगी,कईसन जमाना आगे। अंते-तंते होवत हावय,कलजुगिया झपागे।। भेद-भाव के गिरहा धर लेहे, फुट होथे घर-घर। बाली सुगरीव होगे भाई-भाई, देखत धरथे जर। भुइँया बर होवत हे लड़ाई,महाभारत ह समागे,  अंते-तंते होवत... नवा-नवा खाना होगेहे, होवत हे नवा बिमारी। गली-गली,चौरा-चौरा म, होवत हे चुगली चारी। गीता अऊ पुरान मन ह कते डाहर लुकागे, अंते-तंते होवत... मनखे तन ल काला कहिबे,संसकार भुलावत हे। छोटे-बड़े कोनो ह संगी ,सम्मान कहाँ पावत हे। हिंदू धरम नंदावत,आनी-बानी धरम अब आगे, अंते-तंते होवत...                पवन नेताम "श्रीबासु"         सिल्हाटी,स/लोहारा,कबीरधाम

फाग गीत

........फाग गीत....... चलहा जग मे एक दिवाना घुम रहा। अरे एक दिवाना घुम रहा रे जग मे.... --बचके रहना अरे दिलदार-2जग मे... चलहा जग मे कोन दिवाना कोन सखा। --काखर मया ह दुनिया म छाये-2जग मे... चलहा जग मे कान्हा दिवाना गोप सखा। --राधा के मया ह दुनिया म छाये-2जग मे... चलहा जग मे काहे करण अवतारे तुम। --काहे बर बालक रूप बनाये-2 जग मे.... चलहा जग मे धरम हित अवतारे तुम। --ममता पान बर बालक रूप बनाये-2 जग मे.... ***************************          पवन नेताम "श्रीबासु"   सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम गांधी खेलय होली रे -2 संग म जवाहर लाल नेहरू अरे ह नगर मे दे दे बुलऊवा राधे को अरे कै जोड़ी बाजा जी बाजे अवध मे