माँ बाप

कोई उन्हें श्राप समझते है, कोई उन्हें पाप समझते है।
निरे कुछ मुर्ख है जो छांव को ताप समझते है।
नौजवां लोग मेरी सुन लो, कल माँ-बाप दौलत थे,
पर फरेबी लोग दौलत को, आज माँ-बाप समझते है।
       

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