लाँकडाऊन म दरूहा मन के दशा

कतका कन पिये हे मंदहा भुइयां म परे हे।
करलई हे दाऊ  कुकुर मन चाटे बर धरे हे।

खाये बर पइसा नही काहय हाथ होगे सुन्ना।
खुलगे  भट्ठी ह त  दरूहा मन  ल होगे गुन्ना।

काला बेचिस कहाले लाइस बाई ह रोवत हे।
मस्त मतंगा नशा होगे जिहा तिहा सोवत हे।

कोरोना के  नइहे डर  डट्टा म लाइन लगे हे।
बिहनिया  के  गेहे भट्ठी  परान ऊहे  तजे हे।

वाह रे चतुर सरकार  तोर महिमा हे अपार।
मंदिर के पट बंद हे इहा भट्ठी म लगे दरबार।

             पवन नेताम 'श्रीबासु'
         सिल्हाटी, कबीरधाम(छ.ग.)
चेपटी ल पियत हे चेपटत हे गाल ह ,
उपर ले हाँसत हे बैरी करिया काल ह,
देख जिंदगी ल कैसे उड़ावत हे,
दु पैसा के दारू म का मजा पावत हे,
अब तो सुधर जव घर होवत बदहाल ग,
ऊपर ले काल हाँसय देख तुहर हाल ग ,

 सुरेंद्र निषाद विश्रामपुर सिमगा

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