इश्क़-ए-वफा मे

इश्क ऐ वफा मे दुनिया सिमट जायेगी।
मोहब्बत मे कायनात पलट जायेगी।
बेवफाई का जाल तुम क्या बुनते हो,
     ऐ मोहब्बत मूषक बन जायेगी।।

काट तेरे जाल नाम ले वफा बन।
कर युध्द जीत लेगी ये भी जंग।
मोहब्बत एक  समन्दर सा दिखेगा,
जब तेरे चेहरे से नफरत की परदा हट जायेगी।।

फिर जपते फिरोगी मोहब्बत की माला।
कभी लैला तो कभी बनोगी मधुबाला।
कहोगी ये (मोहब्बत) जादुई छड़ी है,
चाहे तो दुनिया कठपुतली बन जायेगी।।

होगा शुरू दौर मोहब्बत का,
एक-दुजे के लिये ईबादत का।
खो जाओगे हसीन लम्हो मे,
तेरी नजरो से दुनिया मिट जायेगी।।

फिर होगी नजर से नजर का तकरार,
आँखो मे ही मिलेगी प्यार,
मुस्कुराहट मे उनके होगा जादु,
अब तो इशारो मे भी बात हो जायेगी।।

वो तड़प, वो चाह, वो आशाए।
अनंत उठी अब मिलन की इच्छाए।
मेल होगा जमीं आसमां का,
जब काले बादल फट जायेगी।।

बिजलिया कड़केगी, बरसात होगा,
तन्हा पंछी आजाद होगा।
प्यास मिटेगी पपीहा पंछी की,
उस पल स्वाती नक्षत्र झट जायेगी।।

                   🖋   पवन नेताम 'श्रीबासु'
                          सिल्हाटी, स/ लोहारा
                              कबीरधाम (छग)

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