प्रिया प्रकाश
समसामयिक प्रिया प्रकाश पर हास्य रचना...
कुछ नही भैया आँखी के जादू चलाये हे।
जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे।
प्रिया मारत आँखी त कमईया
काम ल घलो भुलत हे।
शिल्पा मारिस आँखी त रामदेव
के एक आँखी नई खुलत हे।
स्कूल, काँलेज, रद्दा बाट ल गारा कस मताये हे,
जेति देखव तेति प्रिया प्रकाश छाये हे।
(जय गंगान)
तोर नैना म काये जादू हे,
लाईका सियान बेकाबू हे,
प्रिया प्रकाश
वाह रे आँखी वाले टुरी
नैना ले सबला मारे छुरी
प्रिया प्रकाश
रूप घलो तोर चिक्कट हे
नखरा ह तोर बिक्कट हे
प्रिया प्रकाश
(तेरे रश्के कमर)
छाये चारो डहर, तोर चर्चा हर डगर,
काहा ले आये टुरी कोनो न ई जानय ओ
इतरावत रथस मटमटावत रथस
आँखी मारके दिवाना बनाथस तै ओ
कुकुर भुकये नही,मांछी झुमये नही,
जब आँखी तोर खराब हो जाही ओ
छाये चारो डहर, तोर चर्चा हर डगर,
काहा ले आये टुरी कोनो न ई जानय ओ
*पवन नेताम "श्रीबासु"*
सिल्हाटी, स./लोहारा, कबीरधाम
मोबा. -9098766347
14/01/2019
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