प्रकाशन 22/09/16

*तोर कोरा म मर जातेंव*
--------*******-----------
मन मंदिर म तोला पधराके
दिन रात मै तोला मनातेंव ।
मन करथे तोर कोरा म
अपन मूड़ ल मढाके मर जातेंव ।।

तहीं देबी तही दुर्गा,
तही पुजा तै मोर भगवान ।
तही रामायण गीता मोर,
गुरुग्रंथ अउ तही कुरआन ।।
आखर आखर पढ़तेंव तोला
पाती पाती पा जातेंव ।
मन करथे तोर....

तही सुर के भजन लगे मोला
तही तुलसी के वाणी ।
तही मीरा के पद लगे मोला
तही कबीर के साखी ।।
तोरे भाव मे बुड़े रतेंव
भजन कस तोला मै गातेंव ।
मन करथे तोर....

तही गंगा के धार लगे मोला
तही यमुना के पानी ।
दु बुँद तोर मया के पीके
तज देतेंव जिनगानी ।।
तही तिरथ तही मंदीर
तोर चौखट म दिन ल पहातेंव ।
मन करथे तोर....

मोर स्वर के संसार तही
तोर अंग-अंग साज समाये ।
लचके कन्हिया बजे चिकारा
रेंगना मे ताल भराये ।।
तोर पाँव के बन के घुँघरु
टुट के बगर जातेंव ।
मन करथे तोर...

तही ह मोर जंतर मंतर
पुजा पाठ तप जोग ।
तही ह मोर जडी बुटी
तही बईद तही रोग ।।
ताबीज बनाके तोला
पहीन छाती म लुकालेतेंव
मन करथे तोर....

बीन देखे बीन जाने
मन मोर घेरीबेरी सोरीयाथे ।
कोनो जनम के लागमानी अस
मन मे मोर जनाथे ।।
जेती देखंव तेती अपन
आँखी के आगु तोला पातेंव ।
मन करथे तोर कोरा मे अपन
मुड़ ल मढ़ाके मर जातेंव....
👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
रचना - फन्नू बैरागी (भजन सम्राट)
पता - बंदोरा (कवर्धा)
जिला - कबीरधाम(छ.ग.)

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तुलसी विवाह

किसान और टमाटर