मृत्यु शैया

"मृत्यु शैया पर पड़े अचेत शरीर को,,
दर्द की अमुभुति नही होती,,
जो कभी एक छोटी सी चिंगारी लगने से,
चिख़ दिया करते थे,,,
आज उन्हे राख़ बन जाने की
अनुभुति नही होती,,,
एक बार उठ कर. रोते हुए को
गले लगाने की तड़प तो होती होगी
पर यहाँ रूह की अनुमति नही होती,,,,,,

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