धीरज रखे ल परथे

समय कतको बिकट होए
धीरज राखे ल परथे
उपरवाला दयालु हे
 भरोषा रखे ल परथे
आषाढ़ सुक्खा सावन सुक्खा
किसान सोचे जुच्छा के जुच्छा
अभी भादो हर बांचे हे
मन ल बांधे ल परथे
ऊपर वाला,,,,,,,
वो ऊपर के भगवान
ते भुइया  के भगवान
एला काबर बिसर जाथस
अको कन मुश्किल म
काबर घबरा जाथस
मेहनत के फल वो जरूर देथे
काबर थर्रा जाथस
तोर पछिना नई जाए अकारथ
बात गांठी म बांधे ल परथे
उपरवाला,,,,,,,,,
तोर आंसू देख आँखी म
देवता कइसे मुस्काये सकहिं
बइठे हे गणपति महराज
ओला करुना बरसाए ल परही
ते हर होथस अन्नदाता
बिरथा नई जाए तोर गोहार
तोर  रददा छेंक नई सके
नदिया डोंगरी अउ पहार
तोर नई होए बिगार
सरधा भगवान म राखे ल परही
उपरवाला,,,,,,,,,,
नई हे कोई बात असम्भव
सब भगवान के हाथ हे
वो चाहे तो तो एक्के छन म
झमाझम बरसात हे
तरिया बांधा लबालब होंगे
नदिया नरवा इतराए लगिन्
उतरे मुहु के खेतखार सबो
देख कइसन मुस्काए धरिन
ख़ुशी के बेरा तोर करे अगोरा
सत के रद्दा बस धरे ल परथे
उपरवाला बड़ दयालू हे
भरोसा राखे ल परथे

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