प्रिये तुम्हारी रूप

       *प्रिये तुम्हारी रूप*
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कंचन बदन सुकोमल अंग
अति आकर्षक रूप तुम्हारी।
नयन कान नाक सुन्दर होठ
पूर्ण चंद्रमा सा मुख तुम्हारी।।

केश कपार होठ अति सुन्दर
क्या खूब बने तुम्हारे अंग।
मुख मंद-हसी चमकत-दंत
सर्वांगण ही श्यामल रंग।।

चौड़ी भुजा लम्बा ग्रीवा
ऊचा सीना पठार।
कमर कसे *''नेहा''* खंभ से
फूले गाल गुब्बार।।

काली काजल लगे नयनन मे
*"नेताम"*के मन को भाये।
कटे भव नयनन के
अंखियाॅ देख सरमाये।।

*"पवननेहा"*की जोड़ी को
भगवन राखे बनाये।
हे प्रार्थयन्ते देवाधि-देव
राखो हमे सुखमाये....
राखो हमे सुखमाये.....
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*पवन नेताम "श्रीबासु"*
            *प्रेमी*

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