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मोहनी श्रृंगार है

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होंठो में लगी है लाली,कानो मे है झूमें बाली। कजरारे काले काले,नयन कटार है। बिंदिया है माथ और,सर पे चुनर ओढ़े। नागिन सी चाल लिये,गले मोती  हार है। सोला की उमर हाय,जियरा को धड़काय। मन मोह लेती जब,करती श्रृंगार है। सब उसे चाहते है,पर जिसे चाहती वो उस प्रियतम का वो,करे इंतजार है। पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)

तेरा श्रृंगार

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खुले जब होंठ सुनाती कोयल की कुहकियां। कोई राग सा लगता है जब खनकती चुड़ियाँ । कातिलाना अंदाज नैनन तीर कटार की धार, श्रृंगार साज उड़ती है रंग रंगीनी सी तितलियां।                 पवन नेताम 'श्रीबासु'

जाग उठो अब जागो हिन्दू

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*जाग उठो अब जागो हिन्दू, धरा पड़ी संकट मे।* समस्या की भीड़ खड़ी है, देखो तुम्हारे निकट मे।। जिनको हमने शरण दे रखा,वही हमारे विरोधी है। घर का भेदी लंका ढाये, ऐसे बन गये भेदी है।। दिखला दो हिन्दू की ताकत,शंकर के हम वंशज है। दुश्मन के लिए क्रोधी, नही तो सरल सहज है।। रामनाम की लेख लेकर, तुमने बांधे योजन समुंद को। बाढ़ लाने की ये बाते करते,पी जाओ ऐसे बूंद-बूंद को।। *जनम से सीधे है हम सब, अब टेढ़ा हो दिखला दो* *मार भगाओ नमकहरामो को,या सीने मे तिरंगा गड़ा दो।।*            पवन नेताम 'श्रीबासु' सूर साहित्य समिति कबीरधाम (छ.ग.)

फाग- अब की होरी पधारो श्याम

अब की होरी पधारो श्याम,    मोरे बरसाने मे ठाड़ो श्याम।।   भेजूं चिठिया मै वृंदावन धाम-2    अब की होरी पधारो श्याम।                     (1) बाल सखा मिल सब आस लगाये। कुंवर कन्हैया को इस होरी मे बुलाये।   विनती हमारी सुन लो सुखधाम-2      अब की होरी पधारो श्याम।                  (2) मूरख जिवरा अब तुम्हारी है प्यासी। तिल तिल उमरिया के होई विनाशी।  रंगा दो कन्हैया जी रंग घनश्याम-2      अब की होरी पधारो श्याम।                     (3)    आवन परय जब संकट धेनु पर।      जनम धरे तुम यादव कुल पर।        गौ माता सम तारो श्याम-2       अब की होरी पधारो श्याम।            पवन नेताम 'श्रीबासु'        सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग. सूर साहित्य समिति कबीरधाम(छ.ग.) आप सभी को होली की अशेष शुभकामनाएं... 0...

मंदहा मन के लाँकडाऊन म हाल

का करव कइसे करव घर भीतरी ही घुमत हे। न नींद आवत हे न चैन, सुतत हे न बइठत हे। न दारू न गुटका गजब जीव चुटपुटावत हे। का करय चाय पी पी के मन बपरा ल समझावत हे। कोनो कहत हे गैस बनत हे कोनो कहत हे बीपी बढ़त हे। 21 दिन कब पुरही ऊखर तो उल्टा गिनती चलत हे। जइसे खुलही भट्ठी संघरा चार पऊवा नपाहूँ। मरव  चाहे  बचव  एकेट्ठा .सबो  ल चढ़ाहूँ। जा वो बाई तोर रोज रोज के सराप ह लग गे। साले कोरोना कते मेर ले चीन ले भारत म बुलग गे। समारू बुधारू ह कोरोना दवई खाये कस जनावत हे। रहि नइ सकन काहय पीये बगर अब कइसे रहावत हे।                    पवन नेताम 'श्रीबासु'            सिल्हाटी कबीरधाम (छ.ग.) प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना वायरस के चलते 21 दिन के लिए लाँकडाऊन किया गया है तब शराबियों की दशा पर व्यंग 29/03/2020