प्रेम के मीठे गीत फिर गाना होगा।

मुक्तक लोक साहित्य संस्था
सजल क्रमांक -2
अध्यक्ष- सुधा दीदी जी

मै बुलाऊंगा तुझको तो आना होगा।
प्रेम के मीठे गीत फिर गाना होगा।

बेवफाई के कितने जखम है भरे,
अपने दिल के दर्द सुनाना होगा।

हो गई अरसे अब रूसवाई छोड़ दो,
फिर कभी रूठना और मनाना होगा।
 
अब तलक दुनिया ए सताती रही,
प्रेम के खिलाड़ी से मात खाना होगा।

हम अपने है अपनो से मिलकर रहे
जो छोड़ जायेंगे वो बेगाना होगा।

        पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी. स/लोहारा कबीरधाम

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