बदरिया रे

बदरिया रे..बदरिया रे...
जरा खोजे के लादव रे मोर सँवरिया -2
बदरिया रे .....

चंदा ल पुछेव,चकोर ले पुछेव,
प्रेम विभोर नाचत मंजोरे ल पूछेव।
-कोनो मोर देखेव जहुरियाँ रे..बदररिया रे..

अमवा म कोयली ह कुहू कुहू बोलय
चकवा अऊ चकवी बस प्रेम हो झूलय।
मोर पिरोही ल संदेश दे बिजुरिया रे..बदररिया रे

              पवन नेताम 'श्रीबासु'
     सिल्हाटी, कबीरधाम (छ.ग.)
                 04/02/2018

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