नारी

नारी हर रूप म जनम लेवय, नारी के महिमा भारी हे।
कभू दशानन ल वो मारय,कभू महिषासुर संघारी हे।
प्रेम भगति अमर कर दिस, सुन ओखर चारी तै......,
कान्हैया के दरशन जेन पाईस, वो मीरा भी नारी हे।
      
                  पवन नेताम 'श्रीबासु'
        सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम

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