सीख

राजनीति
कुर्सी को लकड़ी समझा तो कीड़ा कुर्सी को खा जाता हैं।
और
कुर्सी को कुर्सी समझा तो कुर्सी आदमी को खा जाता है।

अहम्
बाढ़ से तकरार कर पेड़, बह जाता है।
और
बाढ़ से नम्र हो कर घास, रह जाता है।

सहनशीलता
मेहनत करने वाला धूप और पानी को सह जाता है ।
और
मेहनत कराने वाला धूप और पानी में ढह जाता है।

घमंड
आग को जो आग समझता वो बच जाता है।
आग को जो खाक समझता वो खप जाता है।
   
          -पवन नेताम 'श्रीबासु'

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