तुलसी

माता बृंदा तुलसी होगे, 
विष्णु होगे सालिकराम।
धरिन नवा अवतार प्रभू जी,
आगे बनके सुख के धाम।

अब निद्रा ले जागव जल्दी,
प्रभु जी अपन सम्हालव भार।
संग-संग तुलसी माता के,
अंगना रहव बिराज हमार।

जय लक्ष्मीपति दीनदयाला,
बगरावव सुख-शांति उजास।
हम सब आवन तोरे लइका,
 पुरा करव मन इच्छा आस।

                पवन नेताम 'श्रीबासु'

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