जस गीत

मैया राहू जगत बंधू सेवा म आवय हो माँ।

ईन्द्र ले उतरय बछेरवा हो जेखर अंगुर दुई कान
जेखर दुई दुई कान महलो ले उतरय सुन्दर रनिया हो
घोड़वा के आरती उतार माथे तिलक लगा
 मैया राहू जगत पांडव सेवा म आवय हो माँ।

कौन लगावय घना लिमवा हो घना लिमवा के छांव
घना लिमवा के छांव,कौन कोड़ावय सुंदर सगरी हो
कौन करय असनान कौन करय जल पान
मैया राहू जगत पांडव सेवा म आवय हो माँ।


बेटिया बुलादे बननीन के हो मैया सुन लौ मोर बात
मैया मानव मोर बात,नरियर मंगाये झुरमुर के ह
मै तो जावव हिंगलाज मै तो जावव दरबार..
नरियर चढ़ाबो देवी दुर्गा ल
मैया होई है सहाये मै तो मांगव वरदान
राहू जगत पांडव सेवा म आवय हो माँ।

बेटिया बुलादे कड़रिन के हो मैया सुन लौ मोर बात 
मैया मानव मोर बात, खमिहा मंगाये झुरमुर के ह
मै तो जावव हिंगलाज मै तो जावव दरबार..
खमिहा चढ़ाबो देवी दुर्गा ल 
मैया होई है सहाये मै तो मांगव वरदान
राहू जगत पांडव सेवा म आवय हो माँ।

           पुरखा के थाती
        पवन नेताम 'श्रीबासु'
   सिल्हाटी,स/लोहारा,कबीरधाम

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