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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

खूं के आँसू मुझको रूलाया न कर

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खूं के आँसू मुझे रूलाया न कर। इस तरह मुझे याद आया न कर। सामने मेरे डोली तेरी उठने लगी, इस तरह अर्थी मेरी उठाया न कर! जमाने से दाश्ता हमारी मिट जायेगी, इस तरह खत को जलाया न कर! राह मे तेरी  फूल हम बिछाते रहे, तू कांटे बिछाकर बुलाया न कर! दर्दे गम की तू मुझको दरिया दे गई, इस तरह तड़पा मुसकुराया न कर! बेखुदी की हद खुद पार कर गई, बेवफा कहके मुझे बुलाया न कर।              पवन नेताम 'श्रीबासु'          सिल्हाटी, कबीरधाम (छग)

वक़्त बेवक़्त छत से इशारा न कर

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वक़्त बेवक़्त छत से इशारा न कर । हो  चुके हैं  पराये  पुकारा  न कर । सुरज तेरे दीदार मे नही निकलेगा, ये बेवफा चेहरा अब सवारा न कर। जिन्दगी हो गई किसी और के नाम, मेरे इंतज़ार मे समय ...

बदरिया रे

बदरिया रे..बदरिया रे... जरा खोजे के लादव रे मोर सँवरिया -2 बदरिया रे ..... चंदा ल पुछेव,चकोर ले पुछेव, प्रेम विभोर नाचत मंजोरे ल पूछेव। -कोनो मोर देखेव जहुरियाँ रे..बदररिया रे.. अमवा म क...

प्रेम के मीठे गीत फिर गाना होगा।

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मुक्तक लोक साहित्य संस्था सजल क्रमांक -2 अध्यक्ष- सुधा दीदी जी मै बुलाऊंगा तुझको तो आना होगा। प्रेम के मीठे गीत फिर गाना होगा। बेवफाई के कितने जखम है भरे, अपने दिल के दर्द सु...

जरा अब मान जाओ

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-------गीत----------- करना हमको तुमसे प्यार... तुम्हीं हो मेरी दिलबर यार,                             जरा अब मान जाओ-2 @@@@@@@@@@@@ कहा जाओगी सुन मेरी ज़ान, ये दुनिया हो गई है बेईमान। लगी तुम्हें उमर है अठ...