तलवार ए धार बनाता हूँ

काया दे पलटे भारत की ऐसे सूत्रधार धार बनाता हूँ।
भोले- भाले इन  मासूमो  को  होशियार बनाता हूँ।
हिन्द देश का वासी हूँ कर्तव्य न अपना भूल पाता हूँ।
मांज कलम शमशीर उनकी, तलवार ए धार बनाता हूँ।

मिटा निरक्षर के नामो को साक्षर सब बन जायेगा।
चीन जपान रूस आष्ट्रेलिया से आगे बढ़ जायेगा।
हुनर  क्या होती है  सबको भारत अब दिखलायेगा।
ए.पी.जे.अब्दुल बन हर बच्चा मिसाईल बनायेगा।
                                 पवन नेताम 'श्रीबासु'
                            सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम

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