मुक्तक

ये कारिगरी ये मचलती अदाये ये शर्मो हयां है।
ये जुल्फे ये काजल ये सजावटें करती बयां हैं।
ये जवां दिल पैमाने ईश्क की मय चख ले जरा,
अभी मेरा दिल भी जवां है तेरा दिल भी जवां है।

पाप को पुण्य में भुगतान की आदत है मुझे।।
यानि हर दर्द के सम्मान की आदत है मुझे।।
तुम्हे खुशियाँ हो मुबारक हो मेरे  दोस्त,
मैं पवन हूँ दर्दे तुफा की आदत है मुझेl

मिले कभी लोभ तो कर्तव्य पथ में, मत फिसल जाना!
अपने पथ पर रहना अडिग,पीछे न तुम लौट  आना!
चमक जा  सुरज बनके , डाल दे दुनिया पर तू  रौशनी,
चिरकर अंधेरो को सत्य  के  पथ पर तुम लौ जलाना!
                   पवन नेताम 'श्रीबासु'

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तुलसी विवाह

किसान और टमाटर