लोकतंत्र बेमानी है..
लोकतंत्र बेमानी है।
बस सत्ता हथियानी है।
पैसा पीछे भागते नेता,
कुर्सी के दीवानी है।
कितने जज्बाते मारे है
दिल से वो हैवानी है।
भरी आँख में मक्कारी
दिल मे बेईमानी है।
जाने कितने वादा करते
झूठी उनकी जुबानी है।
मक्कारी,छल,झूठ,कपट
नेताओ की निशानी है।
नेता है नेता ही रहेंगे,
नेता की यही कहानी है।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम
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