कविता दिवस पर
कविता दिवस पर मै मंद बुध्दि कुछ कहना चाहता हूँ...
कविता कोई कला प्रदर्शनी,
और न ही प्रतिभा व्यापार होती है।
कवि तो प्रकृति का घून है,
जो उनकी कसौटी को उकेरती है।।
मै मंद बुध्दि मरम खुदेरू,
पड़ा हू प्रकृति की गोद मे।
कोई गाता प्रकृति की पीड़ा,
कोई करता विनोद मे।।
काव्य कविता तो अंतरंग लहर है *'पवन'*,
कोउ वृहत,कोउ लघु रूप।
लघु तो क्षणिक दूर चले,
वृहत चलती युगो युग।।
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*पवन नेताम 'श्रीबासु'*
सिल्हाटी,स/लोहारा
कबीरधाम (छग)
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