मतला

किसी की बुराइयो को देखते भी हो *नेताम*,
⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡
तो बिजली की चमक की तरह देखो।
जो पल भर मे नष्ट हो जाये..

मै हवेली नही जो छांया देकर रहने मे दु:ख दू।

मै तो मिट्टी का घर हूं साकी,
जो गर्मी मे ठंडी और ठंडी मे गरमाहट का सुकूं देता हू।
          .....  नेताम

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