गीत - कैसी ए दुनिया बनाई
कैसी ए दुनिया बनाई

*वाह जी कन्हाई तूने कैसी ए दुनिया बना..ई.. वाह जी कन्हाई तूने।
किसी को सुख दीये -3 किसी पर दुख आज आ..ई.. *वाह जी कन्हाई तूने।
******************************
कही पर शराबी बिखरे,
चौक-चौक को जुआरी बैठे।
गलियन पर झगड़े होते,
बेसहरा को सब ऐठे।
मनोरंजन की -3 कैसी ऐ पाठ पढ़ा..ई... *वाह जी कन्हाई तूने।
**********************************
कईयो यहा लुच्चे लफंगे,
रोज यहा करते दंगे।
पिता पत्नी को मार रहा है,
मजबूर हो चढ़ रही है फंदे।
बेटी की ईज्जत -3 आज दांव पे आ..ई.. *वाह जी..*
**********************************
स्वयं को कोई पंडित कहता,
कोई स्वयं को मुल्ला।
एक कहता राम यहा रहता,
एक कहता यहा अल्ला।
जात-पात के -3 कैसी ये भेद बना..ई.. *वाह जी..*
*************************************
कोई कहता *बेटा* कुल का दीपक,
कोई कहता मेरा वारिश।
*बेटी* है पर कुटिये की,
नही चाहिये आँसुओ की बारिश।
बेटी की जान अब -3 कोख मे भी बच न पा..ई.. *वाह जी कन्हाई तूने।*
-----------😂😂😂---------
*रचना - पवन नेताम "श्रीबासु"*
सिल्हाटी स/लोहारा
जिला - कबीरधाम(छग)
मोबा.- 9098766347

*वाह जी कन्हाई तूने कैसी ए दुनिया बना..ई.. वाह जी कन्हाई तूने।
किसी को सुख दीये -3 किसी पर दुख आज आ..ई.. *वाह जी कन्हाई तूने।
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कही पर शराबी बिखरे,
चौक-चौक को जुआरी बैठे।
गलियन पर झगड़े होते,
बेसहरा को सब ऐठे।
मनोरंजन की -3 कैसी ऐ पाठ पढ़ा..ई... *वाह जी कन्हाई तूने।
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कईयो यहा लुच्चे लफंगे,
रोज यहा करते दंगे।
पिता पत्नी को मार रहा है,
मजबूर हो चढ़ रही है फंदे।
बेटी की ईज्जत -3 आज दांव पे आ..ई.. *वाह जी..*
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स्वयं को कोई पंडित कहता,
कोई स्वयं को मुल्ला।
एक कहता राम यहा रहता,
एक कहता यहा अल्ला।
जात-पात के -3 कैसी ये भेद बना..ई.. *वाह जी..*
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कोई कहता *बेटा* कुल का दीपक,
कोई कहता मेरा वारिश।
*बेटी* है पर कुटिये की,
नही चाहिये आँसुओ की बारिश।
बेटी की जान अब -3 कोख मे भी बच न पा..ई.. *वाह जी कन्हाई तूने।*
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*रचना - पवन नेताम "श्रीबासु"*
सिल्हाटी स/लोहारा
जिला - कबीरधाम(छग)
मोबा.- 9098766347
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