मोला सुरता आथे तोर

*मोला तोर सुरता आथे **
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जब छाथे दुख के बादर        
आंखीले एक मन आगर ।
रही रही के आंसु बोहाथे
मोला तोर सुरता ह आथे
मोला तोर सुरता ह आथे।।

वो नदिया तिर के गाँव
वो बर पीपर के छाँव ।
अमरईया के झुलना म
जब मन ह मोर झुल जाथे ।
मोला तोर सुरता....

मोला देख के तोर मुश्काना
छुईमुई कस तोर लजाना ।
मोर कान मे जब कोनो
आके चुरीला खनकाथे ।।
मोला तोर सुरता....

वो पुन्नी केहे  रात
अऊ वो मया पिरित के बात ।
चँदा के तिर म धीरे धीरे
जब चँदैनी हर आ जाथे ।।
मोला तोर सुरता....

जव बाजय घडी घंट झमाझम           
होवे आरती पूजा ।
मंदिर के दिया जईसे
अंधियारी रात मे चमक जाथे ।
मोला तोर सुरता....

कोन बखत कोन बेरा
कोन रुप मे कहाँ मिल जाही ।
जब रोवत लइका के मुंख मे
हंसी हा छाजाथे ।।
मोला तोर सुरता....

दाना दाना बर तरसेल होगे
मुँह मे आगे परान ।
जब कोनो गरीब के चुल्हा के
धुँगीया छानी ले उड़ आथे ।।
मोला तोर सुरता....

बोतल म हे बंद जिनगानी
कांहीच काम के नइ हे ।
मरे के बेरा दू बुंद पानी
जब गँगा जल बन जाथे ।।

रही रही के आंसु बोहाथे।
मोला तोर सुरता ह आथे
मोला तोर सुरता ह आथे....

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