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Koi diwana kahata h

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! मोहब्बत ...

हंगामा

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा कभी क...

प्रिये तुम्हारी रूप

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       * प्रिये तुम्हारी रू प* --------------------- कंचन बदन सुकोमल अंग अति आकर्षक रूप तुम्हारी। नयन कान नाक सुन्दर होठ पूर्ण चंद्रमा सा मुख तुम्हारी।। केश कपार होठ अति सुन्दर क्या खूब बने तुम्हारे अंग। मुख मंद-हसी चमकत-दंत सर्वांगण ही श्यामल रंग।। चौड़ी भुजा लम्बा ग्रीवा ऊचा सीना पठार। कमर कसे *''नेहा''* खंभ से फूले गाल गुब्बार।। काली काजल लगे नयनन मे *"नेताम"*के मन को भाये। कटे भव नयनन के अंखियाॅ देख सरमाये।। *"पवननेहा"*की जोड़ी को भगवन राखे बनाये। हे प्रार्थयन्ते देवाधि-देव राखो हमे सुखमाये.... राखो हमे सुखमाये..... ****************** *पवन नेताम "श्रीबासु"*             *प्रेमी*

प्रकाशन 22/09/16

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* तोर कोरा म मर जातेंव * --------*******----------- मन मंदिर म तोला पधराके दिन रात मै तोला मनातेंव । मन करथे तोर कोरा म अपन मूड़ ल मढाके मर जातेंव ।। तहीं देबी तही दुर्गा, तही पुजा तै मोर भगवान । तही रा...

जब बाई ह चल दिस मायके

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"सजा मिलत हावय आंखी देखाये के" ******************************* सजा मिलत हावय आंखी देखाये के। मजा मिलत हावय गुस्सा देखाये के। जब भौजी ह चलदिस अपन मायके.... जब बाई ह चलदिस अपन मायके। होगे बिहानिया अब लफड़ा हे बाहरे के। पोछा लगावव कइसे अउ झंझट हे मांजे के। भुलागे हव समय स्कुल जाये के.... जब भौजी ह चलदिस.. गिल्ला होगे भात ह कइसे एहा चुरगे। गुस्सा अउ गुस्सा म अंग-अंग ह घुरगे। कतका होवत हे लफड़ा खाये अउ बनाये के... जब भौजी ह चलदिस.. घर ह रात कन किरा कस चाबत हे। सुवारी के चेहरा ह आंखी म झुलत हे। सुरत आवत हे ओखर मसकरी लगाये के.... जब भौजी ह चलदिस... रतिहा कन बाई ह सोये हावय बाजू। संग म सोये हावय बेटा मोर राजू। देखत हावय सपना मया पायके.... सजा मिलत हावय आंखी देखाये के। मजा मिलत हावय गुस्सा देखाये के। जब भौजी ह चलदिस अपन मायके... जब बाई ह चलदिस अपन मायके .. -------------------------------------------------- रचना - पवन नेताम "श्रीबासु"      सिल्हाटी स/लोहारा        कबीरधाम (छग)     मोबा. 9098766347

मृत्यु शैया

"मृत्यु शैया पर पड़े अचेत शरीर को,, दर्द की अमुभुति नही होती,, जो कभी एक छोटी सी चिंगारी लगने से, चिख़ दिया करते थे,,, आज उन्हे राख़ बन जाने की अनुभुति नही होती,,, एक बार उठ कर. रोते हु...

धीरज रखे ल परथे

समय कतको बिकट होए धीरज राखे ल परथे उपरवाला दयालु हे  भरोषा रखे ल परथे आषाढ़ सुक्खा सावन सुक्खा किसान सोचे जुच्छा के जुच्छा अभी भादो हर बांचे हे मन ल बांधे ल परथे ऊपर वाला,,,,,,, वो ऊपर के भगवान ते भुइया  के भगवान एला काबर बिसर जाथस अको कन मुश्किल म काबर घबरा जाथस मेहनत के फल वो जरूर देथे काबर थर्रा जाथस तोर पछिना नई जाए अकारथ बात गांठी म बांधे ल परथे उपरवाला,,,,,,,,, तोर आंसू देख आँखी म देवता कइसे मुस्काये सकहिं बइठे हे गणपति महराज ओला करुना बरसाए ल परही ते हर होथस अन्नदाता बिरथा नई जाए तोर गोहार तोर  रददा छेंक नई सके नदिया डोंगरी अउ पहार तोर नई होए बिगार सरधा भगवान म राखे ल परही उपरवाला,,,,,,,,,, नई हे कोई बात असम्भव सब भगवान के हाथ हे वो चाहे तो तो एक्के छन म झमाझम बरसात हे तरिया बांधा लबालब होंगे नदिया नरवा इतराए लगिन् उतरे मुहु के खेतखार सबो देख कइसन मुस्काए धरिन ख़ुशी के बेरा तोर करे अगोरा सत के रद्दा बस धरे ल परथे उपरवाला बड़ दयालू हे भरोसा राखे ल परथे