मुक्तक
.नया पाने की चाहत मे पुराना छुट जाता है।
तुझे अपनाऊ तो मुझसे जमाना रूठ जाता है।
मोहब्बत पढने लिखने मे आसान है दोस्तो
मोहब्बत को निभाने मे पसीना छुट जाता है।
दिल के बातों को नज़रों से किया करतें है।
उस शबनम को आँखो से पिया करते है।
इश्क मोहब्बत की जिसको भी है नज़र जो लगी,
बंद आँखो मे भी उन्हे देख लिया करते हैं।
मोहाबत की गलियों मे जां निसार कर ले।
मिले ढंग कोई लड़की तो इजहार कर ले।
हो जायेंगी शादी तेरी फिर होगी पछतावा,
अभी उमर है तेरी काचा जा तू प्यार कर ले।
मजा है कितना प्यार मे आजमा के देख ले।
बैठा के बुलेट मे लड़की तू घुमा के देख ले।
सहन शक्ति तुझमे कितना ये कैसे जानेगा,
उनके भाइयों के मार तू अब खा के देख ले।
झुका मत नजरे तू दुनिया उड़ान देखता है।
हिंदू है तो प्रार्थना मुस्लिम अजान देखता है।
इंसा है तो इंसानियत का थोड़ा रखले जिगर,
क्यो गला काटने गरीब का मकान देखता है।
तुम्हारा रूठना तड़प से कम नही।
जह़र दे दो यार पर ये सितम नही।
इश़्क के कहर बहुत सहे है पर,
तुम्हारे रूठने जैसा कोई गम नही।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
तुमसे दूर रहना अधूरा सा लगता है।
तेरा पास आना कमी पूरा सा लगता है।
जिन्दगी मे भी कैसे-कैसे मोड़ आतें हैं,
पास रहकर भी बिछड़ा सा लगता है।
समीक्षा हेतु....
इस कदर तुमसे हम, दरकिनार हो गए।
जैसे बहती दरिया मे, हम क्षार हो गए।
जिन्दगी भर जिन्दगी मे रहने का वादा था,
वक्त की बाढ़ मे तुम इस पार और हम उस पार हो गए।
वक्त के बदलते तुम माझी हम पतवार हो गए।x
पहली बार किसी परीक्षा मे हारा सा लगा।
ये जिन्दगी आज मुझे गवारा सा लगा।
ये संसार वास्तविक मे कर्म आधारित है,
कर्म के बिना आज जिन्दगी मारा सा लगा।
किसी की याद आज तड़पा गई।
कम्बख्त हवा उनकी याद दिला गई।
बड़ी लम्बी पिरोई थी ख्वाबों की माला,
उनकी वो ख्वाब आज रूला गई।
पीके.
रक्त से शब्द सजाएं थे,
सिर कट गए,
धड़ लड़ते रहे
तब हिंदू कहलाए है।
कभी महोब्बत का दर्द तो कभी ज़ख्म याद आते हैं।
कभी उनका रूठना तो कभी मनाना याद आते हैं।
कहते है मोहब्बत की यादें तो मरने के साथ जाता है,
पता नही कुछ लोग मोहब्बत को कैसे भूल जाते हैं।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
गोद मे सर रख मेरा तुम जो देते थपकिया।
आंसुओं को पोंछ देते बंद करती सिसकिया।
धड़कनो सांसो निगाहों ने निभाया हर धरम।
पर तुम्हारे एक ही जुमले ने तोड़े हर भरम।
फूल मुह न मोड़ते कांटे न दामन खिचते..
प्यार के बदले अगर तुम प्यार देना सीखते।
मया बड़ अजब गजब ग होथे।
मया के आगी ह तन ल जरोथे।
गरब -गुमान सब ल भुलाके,
बस पिरोहिल के माला पिरोथे।
तुम्हारा रूठना तड़प से कम नही।
जह़र दे दो यार पर ये सितम नही।
इश़्क के कहर बहुत सहे है पर,
तुम्हारे रूठने जैसा कोई गम नही।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
माटी के चोला...माटी म जाही..माटी म जाही
हरी बोल बोल,जियत ले राम राम,
मरे म नई आए काम
गा ले रे मनवा राम सिया
भज ले रे मनवा राम सिया
तेरे ही आसमां का परिंदा हूँ।
वादो से मुकर कर शर्मिंदा हूँ।
तू न होता तो मेरा क्या होता,
तेरे ही रहमोकरम मे जिंदा हूँ।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
आज मेरी बिगड़ी हुई तकदीर बना दे
बरसो से सोई हुई मेरी भाग जगा दे
वरना तड़प तड़प के मर जाऊंगा तेरे दर पर
आज मुझे पास बुलाले या पार लगा दे
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