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अवैध संबंध,कटु सत्य

दुनिया में एकमात्र संबंध ऐसा है, जिसमे न जाति देखी जाती है न धर्म, न अमीर न गरीब, न ऊंच न नीच.. और वो संबंध है - "#अवैध_संबंध" बुरी लगने को बात बुरी लग सकती है.. पर शत प्रतिशत सत्य है... जिन जातियों के हाथ का छुआ पानी नही पीना चाहते उन जातियों की सुंदर कन्याएं अगर सोने के लिए मिलें तो हाथ का छुआ पानी तो दूर,पैर के तलवे भी चाट लेंगे लड़की के... जिस धर्म के लोगों से बेपनाह नफरत हो, बंद कमरे में उस धर्म की लड़की के चरणों में बिछ जायेंगे... जाति पात , धर्म अधर्म, छुआछूत ये सब तो समाज में दिखाने और शोषण करने , रौब  गांठने की चीजें हैं।।        --  नेता दीक्षित शर्मा 

कन्हैया का जादू डारे

ऐ रे कन्हैया का जादू डारे,मोला कुछु अब नइ तो सुहाथे। तै नइ जाने कतको नजर उतारेव, आँसू आँखी ले नइ तो सुखाथे..ऐ रे कन्हैया।... नजर उतारेव, डीठ मै डारेव। चिर-चिर लिमवा,मुड़ ले उतारेव। कतको गुनिया मंतर मारे -2 तभो ले पार नइ तो पाथे..... कतका सुघ्घर भोजन बनायेव, कतका कतका काला डारेव। अम्मटहा कढ़ही न मीठा पकवान-2 मोला कुछु ह समझ नइ आथे... नइ जानव कइसे दिन ह पहाथे, मन मतंगा तोर कोती जाथे। तोर बंशी के धुन रे छलिया-2 मोर हिरदे ल हिलोर जाथे.... आखिरी कारण का निकलिस आंखिर नजर,जादू कहा ले लगे हे गीत मे नही भाव म ध्यान देना ये जो हल्का हल्का शुरूरूर है ये जो पागलपन सा शुरूरूर है ये जो ... ये तो तेरे नजर का कुसुर है..             पवन नेताम 'श्रीबासु'        सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)

महिलाओं के सुख का मूल मंत्र

*महिलाओं हेतु सुखमय दाम्पत्य जीवन पाने के तीन मूल मंत्र...* महिलाएं अपने दाम्पत्य जीवन मे दुख,समस्याओं या कष्ट भरे जीवन महसूस करते है,जिनके घर क्लेश आते-जाते रहते है उन महिलाओं को ये तीन साधन को अवश्य साध लेना चाहिए जिनसे उनका दाम्पत्य जीवन अवश्य सुखमय हो सकता है- *पहला मर्यादा रूपी सीमा के अंदर रहना।* मर्यादा भंगता का परिणाम हम सभी सूर्पनखा की दशा को याद कर जान सकते है। कहा अपना घर,देश की सीमा को लांघ कर दुसरे के घर,परिवार या ये कहे कि परवेश मे प्रवेश करने की मात्र कोशिश ने उनको ये परिणाम दिया। परिणाम संक्षिप्त मे कहे तो अपना नाम नक कटी और  भईखई धरा लिया भाई (मायके)के कुल की समाप्ति । *दुसरा सुसंस्कार रूपी साधन(धरण) को धारण कर लेना।* ये संस्कार ही है जिनके कारण चरित्र की बखान होती है,चाहे वह सुसंस्कार हो या कुसंस्कार। भारत देश को अन्य देश संस्कार के कारण पूजते है,विश्व गुरू मानते है। वनवास काल मे अत्रि ऋषि ऋग्वेद के पंचम मंडल के द्रष्टा के द्वारा भगवान राम संस्कार लेना तथा अत्रि ऋषि पत्नी अनुसूइया, जो दक्ष प्रजापति की चौबीस कन्याओं में से एक थी उनके द्वारा माता जानकी को बताये...

सुख और संतोष

*जीव, विशेष कर मनुष्यों के लिए यह शरीर एक सिक्का है। परमात्मा टकसाल है जहाँ प्रत्येक जीव के लिए शरीर एक मापदंड मे निर्माण करता है।*                 जीव सिक्का रूपी तन पाकर इस संसार मे चलता है। वह सिक्का एक हाथ से दुसरे हाथ घुमते रहता है अर्थात् यह सिक्का रूपी तन संसार मे भटकते रहता है।      *मोह,माया,काम,क्रोध,मद,लोभ व ईर्ष्या ये अलग अलग व्यवसाय है। सिक्का एक ही है परन्तु इन अलग-अलग व्यवसाय मे भिन्न-भिन्न स्थानो मे भटकते रहता है। अर्थात् यह शरीर कभी मोह के कारण तो कभी माया तो कभी लोभ...के कारण भटकते रहता हैं।*       *जिस प्रकार सिक्का खजाना या तिजोरी मे कभी चित तो कभी पट (सिक्के का दो पहलू) की अवस्था मे पड़े रहता है या कुछ समय तक वह चित और कुछ समय पट की अवस्था मे तिजोरी मे रहता है और यही प्रक्रिया उनके स्थान बदलने पर होते रहती है।*       ठीक उसी प्रकार इस शरीर को इस संसार मे या सूक्ष्म रूप मे कहे तो परिवार मे चित की अवस्था मे सुख और पट की अवस्था मे दु:ख की प्राप्ति होते रहती है और यही परिवर्तन इस संसार क...

मुक्तक

.नया पाने की चाहत मे पुराना छुट जाता है। तुझे अपनाऊ तो मुझसे जमाना रूठ जाता है। मोहब्बत पढने लिखने मे आसान है दोस्तो मोहब्बत को निभाने मे पसीना छुट जाता है। दिल के बातों को नज़रों से किया करतें है। उस शबनम को  आँखो से  पिया करते है। इश्क मोहब्बत की जिसको भी है नज़र जो लगी, बंद आँखो मे भी उन्हे देख लिया करते हैं। मोहाबत की गलियों मे जां निसार कर ले। मिले ढंग कोई लड़की तो इजहार कर ले। हो जायेंगी शादी तेरी फिर होगी पछतावा, अभी उमर है तेरी काचा जा तू प्यार कर ले। मजा है कितना प्यार मे आजमा के देख ले। बैठा के बुलेट मे लड़की तू घुमा के देख ले।  सहन शक्ति तुझमे कितना ये कैसे जानेगा, उनके भाइयों के मार तू अब खा के देख ले। झुका मत नजरे तू दुनिया उड़ान देखता है। हिंदू है तो प्रार्थना मुस्लिम अजान देखता है। इंसा है तो इंसानियत का थोड़ा रखले जिगर, क्यो गला काटने गरीब का मकान देखता है। तुम्हारा रूठना तड़प से कम नही। जह़र दे दो यार पर ये सितम नही। इश़्क के  कहर  बहुत सहे है  पर, तुम्हारे रूठने जैसा कोई गम नही।                 पवन नेताम 'श...

वहसी दरिंदो का ऐसा अंजाम होना चाहिए

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समाचार पत्र भी पेश है  वहशी दरिंदो का, ऐसा इंतजाम होना चाहिए । सोचने पर ही काँप उठे, ऐसा अंजाम होना चाहिए ।। दो मासूम बच्चों पर, वहशी बनकर झपट पड़े । क्रंदन सुनकर शेष दरिंदे, रहे देखते खड़े खड़ें। ऐसें दरिंदो की इज्ज़त, नीलाम होना चाहिए, सोचने पर ही काँप उठे, ऐसा अंजाम होना चाहिए। रूदन,क्रंदन और पीड़ा से, ह्रदय नही क्यों अकुलाये  ? मानवता सब भुल गये, तुम पशुता लेकर आये  ? संहार करो इन पशुओं का, दूजे को पैगाम होना चाहिए, सोचने पर ही काँप उठे, ऐसा अंजाम होना चाहिए। देह नोचने वाले तुम तो, मर्यादा सब भूल गए  । माँ की ममता, बहन की राखी, रिश्ते सारे भूल गए  ।। हवस के लूटेरों का, न सुबह न ही शाम होना चाहिए सोचने पर ही काँप उठे, ऐसा अंजाम होना चाहिए । राखी जैसे पावन पर्व पर भाई कोई न बन सकें। द्रोपदी की चीर बचाने कोई कन्हाई न बन सकें। दुशासन की इन टोली की बेइज्ज़ती, सरेआम होना चाहिए  अब सोचने पर भी काँप उठे ऐसा अंजाम होना चाहिए।         --  पवन नेताम 'श्रीबासु'        सिल्हाटी, कबीरधाम (छ.ग.)       ...

महि तो आदिवासी अँव

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विश्व आदिवासी दिवस ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ महि तो आदिवासी अँव,महि तो मूल निवासी अँव बीरनरायन,बिरसा मुंडा,रामाधीन गोंड,चेंदरू बैगा रानी दुर्गावती,गुंडाधुर अउ प्रवीरचंद के नाती अँव महि तो............ !! करमा,सरहुल,रेला,लैंजा गुरतुर मांदर के सङ्ग उड़त हवै फुरफुर, पागा कलगी सङ्ग ये गेंड़ी नाँचव चिरई-चिरगुन के भांखा बाँचव ! मँय जंगल के रहवासी अँव........ कोदो,कुटकी,मड़िया अउ जुवांर अमली,अंवरा,मउँहा के रखवार, हर्रा,बहेरा,तेंदू,लाख,चार चिरौंजी  बाघ,भालू सङ्ग खेलन मनमौजी ! मँय धनुषधारी बनवासी अँव....... दवई गोंटी के ये हवय खज़ाना कइसे का के संसो तंहि बताना, माटी म उपजेन,माटी म बाढ़ेन हम प्रकृति सङ्ग म रास रचायेन ! मँय बूढ़ादेव के दासी अँव.......... कतको ये मूल धरम ल बांटत हे नवा- नवा देव बना के छाँटत हे, सिधवा मन के करत हे सियानी मेटे बर भिंड़े हे ये हमर कहानी ! मँय प्रकृति के घाँसी अँव...........                 ---  राजकुमार 'मसखरे'                        09/08/2023 भदेरा (पैलीमेटा/गंडई),जि-केसीजी (छ.ग...

स्त्री

.एक स्त्री वह औरत है जिसे बाकायदा हर महीने माहवारी आती है। वहीं माहवारी जिसको स्त्री अपने 11 साल के उम्र से हर महीने बर्दाश्त करती है। यह माहवारी उनका चॉइस नहीं होता। यह तो कुदरत का दिया हुआ एक वरदान होता है।  वहीं माहवारी जिसमे पूरा शरीर अकड़ जाता है। कमर टूटने लगती है। पेट का दर्द असहनीय होता है। और मानसिक तनाव इतना की सामान्य दिनों में सिर्फ सोच कर ही सिहरन पैदा हो जाती है। हर महीने के माहवारी के दर्द को बर्दाश्त कर अपने आप को अगले महीने के लिए फिर से दर्द सहने के लिए तैयार कर लेना किसी जंग जितने से कम नहीं। हर महीने ना जाने कितने वर्षों तक ये जंग हर महीने जीतती है स्त्री। तब जाके किसी पुरुष के चेहरे की लालिमा बढ़ती है, तब जाके कोई परिवार चहकता है। और तब किसी के वंश की वृद्धि होती है। अरे एक लड़की तो अपने 11 वर्ष की उम्र से ही किसी की बहू किसी की पत्नी बनने कि मोल चुकाती है, हर महीने दर्द सहकर, ताकि किसी दिन वो वंश की वृद्धि की गौरव बन सके। गर्भधारण के बाद 3-4 महीने तो अपने आप से ही परेशान। मूड स्विंग, उल्टी, थकान, मानसिक तनाव, और कमर दर्द तो हिस्सा बनने लगता है जिंदगी का। ...

मोहब्बत को कैसे भूल जाते है

कभी महोब्बत का दर्द तो कभी ज़ख्म याद आते हैं। कभी उनका रूठना  तो कभी मनाना याद आते हैं। कहते हैं मोहब्बत की यादें तो मरने के साथ जाता है, पता नही कुछ लोग  मोहब्बत को कैसे भूल जाते हैं।                     पवन नेताम 'श्रीबासु'

मैडम

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यूरोप में जो वेश्याएं होती है, उनकी एक हैड होती है, जो बुढ़ापे में कदम रख चुकी होती है, ओर ग्राहक उसके पास जाना पसंद नही करते, ऐसे में उसे वेश्याओं की हैड बना दिया जाता है,  अंग्रेजो ने उन्हें नाम दिया "मैडम" का, मैडम शब्द विदेशी वेश्यालयों से चलते हुए भारत के वैशालयों मे प्रवेश कर गया, अब देखो यहां, लोग अपनी पत्नियों को, बहनो तक को अनजाने में मैडम कहकर पुकारते है,महिला अध्यापकों को, जो देवी का दर्जा रखती है,को भी मैडम सम्बोधन अच्छा लगता है। जबकि भारत में किसी महिला के आगे श्री मति लगाया जाता है, श्री का अर्थ होता है 'लक्ष्मी' और मति का अर्थ होता है बुद्धि, अर्थात लक्ष्मी और सरस्वती जैसी देदीप्य स्त्री। अब आप ही निर्णय लें कि अपने परिवार की महिलाओं को पश्चमी सभ्यता के अनुसार संबोधन देना है या फिर भारतीय संबोधन....!!! जय मां भवानी जय मां भारती 🙏🙏