हसदेव के जंगल बचा लेवव न

धरती के छाती के गोरस सूखागे,
तरिया कुवा नदिया नरवा अटागे,
-बिजली बनइंया के कोयला सिरागे,
हाय रे विकास बलि जंगल के मांगे।
उठव ग भइया जागव ग भइया,
हमर जिनगी के सांसे रखइया 
सिरान दिहव का,
छइंहा ए सुघ्घर,हसदेव के जंगल
बचा लेवव न..

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