भजन- भोले जी के सजत हे बरात
भोले जी सजत हे बरात , सजावय भूत पिशाच, 'के देवता सब हासय रे..'-2 के देवता सब हासय रे,-2 कैलाश म..-2 भीड़ लगे हे अपार,भूत परेत दिखय झार, के देवता सब.. काने म पहिरावय बिच्छू के बाला,नर मुंडन के पहिरै माला। चुपरे हावय अंगे भभुतिया, कनिहा पहिरै मृगन के छाला। जनेऊ बने हे..-2 गौहा डोमी साँप, दुजे के चंदा चमके माथ के देवता सब हासय रे.. बिना मुड़ी के भुतवा राजा, गदकावत हे गुदुम बाजा। चटिया मटिया टिमकी दफड़ा, कहा पाबे भैया उहा झगड़ा। सौरा भौरा ह..-2 सातो राग मिलाये, परेतवा देवय ताल बजाये, के दुम दुमी बाजा बाजय रे.. रक्सीन टुरी गाना गावय, झिथरी परेतिन नाच दिखावय। किसम किसम के नाच गाना, बुढ़वा नंदी के गोड़ थिरकाना। घुघवा देवता..-2 पइसा ल उड़ाये, उछल मंगल सब मनाये के देवता सब हासय रे-2 पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम दिनांक- 21/01/2018