कुकुर ह बिलई ल भागे
अहा दे कइसन जमाना ह आगे।
देखव तो कुकुर ह बिलई ल भागे।
जइसे अधिकारी ह घूस ल सूंघे।
वईसने कुकुर ह बिलई ल तुके।
इंखरो बीच भैया बैर भाव ह हरगे।
पर मनखे अपन घमंड म मरगे।
फेर बघवा,बईला संग म पीहि पानी।
मितवा बन संग घुमही पशु अऊ परानी।
पशु तन घलो प्रेम भाव ल समझगे।
पर मनखे बैरी-दुश्मनी म उलझगे।
इही बात के तो आज रोना हे जी।
एक दिन ए तन ल तो खोना हे जी।
'पवन' छोड़ घमंड, कुछु तो करम कमाले।
मनखे नही त पशु कस तो जिनगी बिताले।
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पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम

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