जय हो गजानन
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गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी।
पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी।
कांधे म जनेऊ साजे, गर पहिरे मोतियन माला।
बल-बुध्दि के खान स्वामी,महिमा बड़ निराला।
पांव म चंदन खड़ऊ, बदन म पिताम्बर डारे जी..
देवता जब पार नई पाये, तब-तब तोला पुकारे।
बड़े-बड़े मायावी दानव ल, छिन मे तै हा मारे।
अर्धभगवान क्रोच ल,सवारी मूसवा बना डारे जी..
गजानंद गणपति गनराजा,सुमर-सुमर गुन गाये।
सोनहा गड़े हिंदोलना,रिध्दि-सिध्दि चवर डोलाये।
सात चक्कर दाई ददा के,तीनो लोक घुम डारे जी.
गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी।
पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी स./लोहारा, कबीरधाम
गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी।
पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी।
कांधे म जनेऊ साजे, गर पहिरे मोतियन माला।
बल-बुध्दि के खान स्वामी,महिमा बड़ निराला।
पांव म चंदन खड़ऊ, बदन म पिताम्बर डारे जी..
देवता जब पार नई पाये, तब-तब तोला पुकारे।
बड़े-बड़े मायावी दानव ल, छिन मे तै हा मारे।
अर्धभगवान क्रोच ल,सवारी मूसवा बना डारे जी..
गजानंद गणपति गनराजा,सुमर-सुमर गुन गाये।
सोनहा गड़े हिंदोलना,रिध्दि-सिध्दि चवर डोलाये।
सात चक्कर दाई ददा के,तीनो लोक घुम डारे जी.
गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी।
पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी स./लोहारा, कबीरधाम

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