तेरी ही सुरत सा लग रहा था..

काली  घटा देखी तेरे बालो में
सोने सा बदन चमक रहा था ।
जो चाँद देखा मैंने आसमां  पे
तेरी ही सूरत सा लग रहा था ।।

हिरणी से चंचल है जलवे तेरे
आँखो से नशा छलक रहा था।
पैरो की पड़ती ऐसी फुदकियां
घुंघरू पायल के छनक रहा था।

                   पवन नेताम "श्रीबासु"
                   सिल्हाटी, स/लोहारा।

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