मुक्तक



औरों की बुराई को न देखूँ वो नजर दे,
अपनी बुराई को परखने का हुनर दे
मुझे तो अपनी महल खड़े करने का हिम्मत दे दिये,
ऐ खुदा अब इन भुखे-नंगो को बसर दे।
                 पवन नेताम 'श्रीबासु'

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