मोर गांव के सुख-दुख
छानी म खपरा,
भिथिया म माटी,
तोर गीत गुनगुनाववववव
अइसन सिल्हाटी मोर गांव।2।
उगती म बैठे सहड़ा देव,
बूढ़ती बिराजे दंतेश्री ह।
अलिन गलिन म गौरा चौरा
बीच म मोरे बंजरंग बली ह।
शीतला दाई के कोरा गोहरावववव
अइसन सिल्हाटी मोर गांव...
आधा गांवे इहा नौ करी वाला,
दुख परे इहा नईहे ग्वाला।
धेनु-कन्हैया भुलागे नाता के,
सुन्ना परे गला गौ माता के।
देवारी म सोहई कहा ले मै लाववववव
होत बिहनिया निकले किसनहा,
हरियर पियर लहरावय मोर धनहा।
बिहनिया बईला खेदे बर जाववव
अइसन सिल्हाटी मोर गांव...
इहा के माटी ल जल चुपरे बर.........
खलबल खलबल बोहाथे न......
सिल्हाटी के मेड़ो म धर धर ....
खर्रा नदिया बोहाथे न....
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें