मुक्तक

फुलो मे हम सिर्फ कमल लिखते है।
पैरो मे तेरे हम पायल लिखते है।
*'पवन'की मोहब्बत को तु क्या आजमाती हो,
अरे दिल तो दिल है,
जुबां भी कही खुले तो तुझ पर गज़ल लिखते है।।


प्यार की तुम गीत गवैया लगते हो।

त्योहारे ईंद की तुम सेवैया लगते हो।

हम सब तो यहा भाई है,

एक तुम ही तो हो जो सबके भैया लगते हो।।

*कोयल कुहके तो औरो का चहकना बंद हो जाये।*
*गुलाब खिले तो औरो का महकना गुम हो जाये।*
*ऐ चाँद तुम जुगनू नही जो उजालो मे छिप जाओ,*
*तुम सिर्फ निकलो तो सितारो का चमकना बंद हो जाये।*
   ✍🏻 *पवन नेताम "श्रीबासु"


प्यार की राह मे कांटा ही नजर आया है।

पर क्या करे सनम हमे तेरा ही तेरा चेहरा नजर आता है।।

    

सुकमा वारदात पर मेरा विचार...

तु चिंगारी क्या पैदा करता है बुज़दिल,

हम सीधे आग लगाते है।

हम राम की धरा पर पैदा हुए है,

जो लंका मे ही डंका बजाते है...।।

              पवन नेताम 'श्रीबासु'

बादल भी रोकर कही आ जाते जमीं पर,

खुशिया भी बिन गम के छा जाते दिलो पर,

हीर रांझे यू ही बदनाम न होते....

न होती लड़किया बदनाम,बेवफाई के नाम...।


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