कैसी ए दुनिया बनाई * वाह जी कन्हाई तूने कैसी ए दुनिया बना..ई.. वाह जी कन्हाई तूने। किसी को सुख दीये -3 किसी पर दुख आज आ..ई.. *वाह जी कन्हाई तूने। ****************************** कही पर शराबी बिखरे, चौक-चौक को जुआरी बैठे। गलियन पर झगड़े होते, बेसहरा को सब ऐठे। मनोरंजन की -3 कैसी ऐ पाठ पढ़ा..ई... *वाह जी कन्हाई तूने। ********************************** कईयो यहा लुच्चे लफंगे, रोज यहा करते दंगे। पिता पत्नी को मार रहा है, मजबूर हो चढ़ रही है फंदे। बेटी की ईज्जत -3 आज दांव पे आ..ई.. *वाह जी..* ********************************** स्वयं को कोई पंडित कहता, ...