हिन्दी दिवस पर कविता
हिन्दी पढ़ें,हिन्दी लिखें, हिन्दी ही नित बोलें ।
मन की अपनी भावना को, शब्दों में पिरो लें ।
राज-काज सम्पर्क की, यही है भाषा-बोली,
कर के साहित्य-सृजन,गठरी चितवन की खोलें ।
है मातृभाषा हमारी ,यह जननी के समान,
गरिमा को इसकी,विदेशी भाषा से न तौलें ।
देती है यह संदेश, प्रेम और सद्भाव का,
सुषुप्त चेतना ,चोट कर धड़कन को टटोलें ।
करें पराजित दुश्मन को, वाद में शब्द बाणों से,
आन्दोलनों में भी हुँकार भर वीर- रस घोलें ।
सीखें और करें सम्मान, सभी भाषाओं का,
पर हिन्दी -भाषा बोलने से, कभी न मन डोलें ।
बहुत-बहुत शुभकामना हिन्दी-दिवस पर सबको,
मन वचन कर्म से ‘दशरथ’,बस हिन्दी के ही हो लें।
दशरथ सिंह भुवाल
सोनपांडर, भिलाई छत्तीसगढ़
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