दूध का धुला..

दूध का धुला हुआ यहां कोई नहीं,
खजाना खुला हुआ यहां कोई नहीं।
इस दुनिया में कर्म सबके होते हैं,
कुछ न कुछ मर्म सबके होते हैं।
बस किसी के छप जाते हैं, 
तो किसी के छुप जाते हैं।
                    पी.के.

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