पोरा पटकना
पोरा पटकना
पोरा तिहार के एक अऊ अंग जेन ल पोरा तिहार के संझा बेरा मनायें जाथे। जेन ल पोरा पटकना कहिथे।
पोरा पटके के दू कारन सुने ल मिलथे ।
जेमा पहली धार्मिक कारन हे,
द्वापर जुग म पोरासुर नाम के राक्षस रिहिस जेन ल भगवान कन्हैया ह गांव के मेड़ों म पटक-पटक के मारे रिहिस तेखर सेती आज ले पोरा ल पटक के तिहार ल मनाये जाथे।
पोरासुर ल कन्हैया द्वारा पटके गिस,गांव ले भगाये गिस त पोरासुर कहिस प्रभु भाग तो जहुं पर मैं खाहू-पीहू काला ? त कन्हैया द्वारा कहे गिस कि तै खेत-खार के किट पतंगा ल खाबे अऊ मेड़ो के भीतरी घुसन झन देबे।
दूसर गोठ लोक मान्यता सुने ल मिलथे कि पोरा म ठेठरी-खुरमी ल भरके गांव के मेड़ों म पटके जाथे।
एखर संदर्भ कहिथे कि हमर फसल के नाश करइयां ल खाथे तेखर सेती शुरूआत म ठेठरी-खुरमी ले मुंह मीठा कराये जाथे तहां ले फसल के कटत ले किट पतंगा मन ल खावत राहय।
कुल मिलाके ए मान्यता के पाछू भाव हे कि गांव अऊ खेत-खलिहान म जेन रोग-राई हावय ओखर नाश हो जाये।
एखर एक ठन अऊ मिथक जुड़े हे। हमर सियान मन बताये कि हरेली के दिन नांगर बईला धोये बर पानी गिरना चाही अऊ पोरा के दिन पानी नइ गिरना चाही।
काबर कि पोरा दिन के पानी ल सेठ साहूकार मन पोरा म झोंक के जाता तरी गड़िया देथे , जेखर ले बादर ह जाता कस घरर-घरर बाजथे भर पानी गिरय नहीं, तहाले किसानी म अंकाल या घाटा फेर सेठ साहूकार मनके मान बढ़ जाथे।
एखरे सरलग एक अऊ तिहार आथे-
पोरा के दूसरा दिन नारबोद नाम के तिहार मनाये जाथे। ए तिहार बिसेस रूप ले किसानी संबंधित ही हावय ।
किसानी म जेन रोग-राई, खराबी हे ओला गारी देवत मनायें जाथे, कई जगह ओखर पुतला बना के जलाये जाथे। ए दिन किसान मन भेलवा के डारा ल खेत के चारों मुड़ा खोंच के हूम-धूप देथे। हमर कबीरधाम जिला के कतको गांव म आज भी ए तिहार अऊ परम्परा ल बरसों ले मनावत आवत हे।
मध्यप्रदेश क्षेत्र म घलो मनायें जाथे, ओमन भेलवा के संग नारबोद पेड़ के डारा ल घलो खोंचथे। हमर छत्तीसगढ़ म जेन ल हमन दशमूल कहिथन अऊ ओला हरेली तिहार के दिन दुवारी म लिम डारा संग खोचथन ऊही दशमूल ल मध्यप्रदेश क्षेत्र म नारबोद कहे जाथे।
मध्यप्रदेश क्षेत्र म ए दिन अऊ एक उपाय करथे, जेन मनखे के शरीर म कोनो अंग बिसेस म पीरा रहिथे ऊही जगह ल ओखर घर वाले मन बिना बताये आंक देथे जेखर ले वो पीरा ह दूर हो जाथे।
ऐखर पाछू घलो ऊहीच भावना रहिथे कि हमर किसानी म जेन अवरोधक किट पतंगा आथे ओला दूर करना, संगे संग हमर गांव म जेन रोग-राई हावय चाहे वो फसल म होए चाहे मनखे म ओला दूर करना।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, कबीरधाम (छ.ग.)
दिनांक -10/09/2024
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