देने वाला जब भी देथे कहिथे छप्पर फाड़ के
हमला गरीब कहिथे
देने वाला जब भी देथे, कहिथे छप्पर फाड़ के।
फेर हमला काबर बनायेस गरीब बेकार के ।
कोन जनम के बदला ले, गरीब पैदा करेस तै।
अच्छा बनावत बनावत,मूर्ति ल बिगाड़ डरेस तै।
न चऊर न दार, न खेत न खार के.......
छीन के हमर हासी ल, कहिथस रोवव झन।
दुख के बीजहा देके, कहिथस बोवव झन।
पापी पेट बर कुछू नही, जियव कहिथस मार के...
हमर कोनो पता, न हावय कोनो ठिकाना ।
दुख म कलहरत हन, मुरलीधर अब आना।
दुख ल रोवत, बुलावत हन गोहार के...
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम
मोबा.- 9098766347
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