अऊ आबे जग जननी हो मैया
अऊ आबे जग जननी हो मैया अऊ आबे जग जननी।
अहो दया मया तै राखे रहिबे दया मयाsss
हो ओ..माँ..अंबे माँ हो माँ दुर्गे माँ
अहो दया मया तै राखे रहिबे तै ह ओ दया करणी हो मैया तै हा ओ दया करणी
अऊ आबे....
अहो माटी माटी म तोला सिरजाके प्रान प्रतिष्ठा कराएन।
हम भगत सब मिलके दाई तोर बर कुंदरा बनाएन।
हम दुखियारा तोर चरन म, तार लेबे भव तरिणी हो मैया
अहो सुत उठ के बड़े बिहनिया सेवा तोर बजायेव।
अहो फूलपान गंगा दूबी लाके आरती तोर सजायेव।
नर नारी मन संझा बिहनिया-2 आरती जय जय करनी हो मैया
सेऊक मन तोर गुन ल दाई सुमर सुमर नित गावय।
अलिन गलिन ले देवी बरूवा मन झूमर झूमर के आवय।
तोला रिझाये बर मोर महतारी,गूंगूड़ धूप संग बंदनी मैया...
अऊ आबे जग जननी हो मैया...
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)
शानदार रचना सर
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