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जब मेरा विवाह हो गया

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इश्क हुई तुमको पर एक खता हो गया। तुुुमने देेेखा मुझे यूं फिदा हो गया। मैने माना तुम्हें आशिकी हो गई, पर तब कहा तूने जब मेरा विवाह हो गया। कितनी सिद्दत से तू जो मुझे चाहती। जब मिलू तो कितनी तू दीदारती। मैने देखा है आज आसूं ढोते हुए, क्या करे पवन तुझसे जुदा हो गया।                         पवन नेताम 'श्रीबासु'

रात को तकिया भींगा भींगा कर

तुम्हारी यादो मे तड़प रहे हम रात को तकिया भींगा भींगा कर। देखे थे जो हमनें साथ सपने उन सपनों को सजा सजा कर। नयी थी चाहत नयी थी उल्फत हम दो प्रेमी  नये नये थे, जब वो मुझसे बाते करती अपनी नज़रे झुका झुका कर। प्यार मे अंधे हमी थे पागल गूंगा जुबां हम जो थे रखते, बेवफाई कर पिघला डाला एक सोने को तपा तपा कर। दिल मे है यादें बदन पे जख़्म और कोई निशानी नही है तेरी, वो फेकें अंगूठी हम ढूंढ डाले पानी से रेत हटा हटा कर। बेवफा नाम तेरा कातिल चेहरा लेके चले जमाने डगर पे, हर शहर से पता पूछते तुम्हारी तस्वीर दिखा दिखा कर। जिंदगी टुट के बिखर रही हैं हादसा कहिए या फिर तमाशा, मीन को मारे बिन पानी के हमी को अश़्क मे डूबा डूबा कर।                पवन नेताम 'श्रीबासु'            सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग.)

शीशे का था दिल मेरा चूरा चूर कर दिया

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करके मुझसे बेवफाई मशहू..र कर दिया। शीशे का था दिल मेरा चूरा चू..र कर दिया। करता बेपनाह मोहब्बत, दी..वाना था। डूबा प्यार के नशे मे मस..ताना था।। जमाने की दस्ततूर से मुझे दू..र कर दिया मयखाने की दर पे, अब बस्ती है मेरी। आंसू बन टपक रहा लहू, सस्ती है मेरी। अंगूर की बेटी ने मुझे खजू..र कर दिया महोबत करके तुमसे, गुनेहगार हम जो है। ओढ़े मौत का कफन, तलबगार हम जो है। करके बेपनाह प्यार क्या कसू..र कर दिया                पवन नेताम 'श्रीबासु'           सिल्हाटी कबीरधाम (छ.ग.)                     04/07/2020 जीश्म जां

अब की होरी पधारो श्याम

अब की होरी पधारो श्याम,    मोरे बरसाने मे ठाड़ो श्याम।।   भेजूं चिठिया मै वृंदावन धाम-2    अब की होरी पधारो श्याम।                     (1) बाल सखा मिल सब आस लगाये। कुंवर कन्हैया को इस होरी मे बुलाये।   विनती हमारी सुन लो सुखधाम-2      अब की होरी पधारो श्याम।                  (2) मूरख जिवरा अब तुम्हारी है प्यासी। तिल तिल उमरिया के होई विनाशी।  रंगा दो कन्हैया जी रंग घनश्याम-2      अब की होरी पधारो श्याम।                     (3)    आवन परय जब संकट धेनु पर।      जनम धरे तुम यादव कुल पर।        गौ माता सम तारो श्याम-2       अब की होरी पधारो श्याम।            पवन नेताम 'श्रीबासु'        सिल्हाटी,कबीरधाम (छ.ग. सूर साहित्य समिति कबीरधाम(छ.ग.) आप सभी को होली की अशेष बधाई एवं  ...