झेंझरी के ठेठरी

बच्छर म एक दिन आथे ये तीजा
चुररुस ले बाजे करेला के बीजा
पहिरे बर मिलथे वो रंग रंग के लुगरा
लुगरा बर कर डारेन कूद कूद के झगरा
रात भर मसके हन करू करू भात
दिनभर उपास करेन नारी के जात
लेत बरेत चुल्हा म चढ़गे तेलई
झेंझरी के ठेठरी ल खा दिस बिलई
थूके थूक म बरा चूरे लार म सोंहारी
लटपट चबावत हे रोगही मुखारी
धकर धकर जीव करे लकर लकर बुता
हरु हरु चूरी अउ गरु गरु सुता
चल वो बिसाहिन घर बइठे बर जाबो
घरो घर जाबो अउ फेँकत ले खाबो
गाँव भर देख लेबो सबे के तीजहा
सही सही के सब दुःख ल तन होगे सिजहा
रोज रोज नइ पावन मइके के कोरा
फेर जल्दी आबे रे तीजा अउ पोरा

रचना- संत कवि पवन दीवान रायपुर

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