कुकुर ह बिलई ल भागे
अहा दे कइसन जमाना ह आगे। देखव तो कुकुर ह बिलई ल भागे। जइसे अधिकारी ह घूस ल सूंघे। वईसने कुकुर ह बिलई ल तुके। इंखरो बीच भैया बैर भाव ह हरगे। पर मनखे अपन घमंड म मरगे। फेर बघवा,बईला संग म पीहि पानी। मितवा बन संग घुमही पशु अऊ परानी। पशु तन घलो प्रेम भाव ल समझगे। पर मनखे बैरी-दुश्मनी म उलझगे। इही बात के तो आज रोना हे जी। एक दिन ए तन ल तो खोना हे जी। 'पवन' छोड़ घमंड, कुछु तो करम कमाले। मनखे नही त पशु कस तो जिनगी बिताले। ★★★★★★★★★★★★★★★ पवन नेताम 'श्रीबासु' सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम