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कुकुर ह बिलई ल भागे

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अहा दे कइसन जमाना ह आगे। देखव तो कुकुर ह बिलई ल भागे। जइसे अधिकारी ह घूस ल सूंघे। वईसने कुकुर ह बिलई ल तुके। इंखरो बीच भैया बैर भाव ह हरगे। पर  मनखे  अपन  घमंड म मरगे। फेर बघवा,बईला संग म पीहि पानी। मितवा बन संग घुमही पशु अऊ परानी। पशु तन घलो प्रेम भाव ल समझगे। पर मनखे बैरी-दुश्मनी म उलझगे। इही बात के तो आज रोना हे जी। एक दिन ए तन ल तो खोना हे जी। 'पवन' छोड़ घमंड, कुछु तो करम कमाले। मनखे नही त पशु कस तो जिनगी बिताले। ★★★★★★★★★★★★★★★        पवन नेताम 'श्रीबासु'       सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम

जय हो गजानन

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******************************* गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी। पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी। कांधे म जनेऊ साजे, गर पहिरे मोतियन माला। बल-बुध्दि के खान स्वामी,महिमा बड़ निराला। पांव म चंदन खड़ऊ, बदन म पिताम्बर डारे जी.. देवता जब पार नई पाये, तब-तब तोला पुकारे। बड़े-बड़े मायावी दानव ल, छिन मे तै हा मारे। अर्धभगवान क्रोच ल,सवारी मूसवा बना डारे जी.. गजानंद गणपति गनराजा,सुमर-सुमर गुन गाये। सोनहा गड़े हिंदोलना,रिध्दि-सिध्दि चवर डोलाये। सात चक्कर दाई ददा के,तीनो लोक घुम डारे जी. गजबदन तोला कहिथे , देखत म मन हारे जी। पहली पुजा तोर होवय, सब देवन के दुलारे जी।                    पवन नेताम 'श्रीबासु'           सिल्हाटी स./लोहारा, कबीरधाम