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वाह रे पाकिस्तान..

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वाह रे पाकिस्तान जिसने तुझे अपना दूध पिलाया था। नन्हे हाथ पकड़कर जिसने चलना तुझे सिखाया था।। ऐसी ममतामयी माँ के उपकारों को तू भूल गया। गद्दारी और मक्कारी के फंदे पे तू है झूल गया।। जिसने पैदा किया है तुझको उस पर ही गुर्राता है। कैसा नाकारा है तू जो बाप को आँख दिखाता है।।  जनम से सीधे है पर अब टेढ़ा होकर दिखलायेंगे। भगतसिंह की भाषा में अब तुमको हम सिखलाएँगे।। याद करो सन् संतावन के उठे क्रांति उन ज्वालों को। दुश्मन का मुँह तोड़ने वाले उन भारत के लालों को।।  जीभ पकड़कर तेरी हलक से बाहर हम खींच सकते है। शांतिवादी है किंतु स्वाभिमान पर मुठ्ठी भी भींच सकते है।। अगर रहे औकात में तो हम जीभरकर तुझे दुलारेंगे। लेकिन फिर भी न सुधरे तो तेरे सीनेे मे तिरंगा गाड़ेंंगे।।                   पवन नेताम 'श्रीबासु'           सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम भ्रमण भाष-9098766347,8770679568 अणु डाक-pawannetam7@gmail.com अंतरताना-pawannetam.blogspot.com

काली घटा ...

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काली  घटा देखी तेरे बालो में सोने सा बदन चमक रहा था । जो चाँद देखा मैंने आसमां  पे तेरी ही सूरत सा लग रहा था ।। हिरणी से चंचल है जलवे तेरे आँखो से नशा छलक रहा था। पैरो की पड़ती ऐसी फुदकियां घुंघरू पायल के छनक रहा था।                    पवन नेताम "श्रीबासु"                    सिल्हाटी, स/लोहारा                  संपर्क -9098766347

उसी दिया मे उजाला होगा.

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आज मुस्कुरा रहा है,वो कभी दर्द पाला होगा। चिकनी सुन्दर इन पैरो मे, कभी छाला होगा। पवन तू चलते रहा भगवद् गीता की राह पर, क्योकि जलेगा उसी दिया मे तो उजाला होगा।                  पवन नेताम "श्रीबासु"                    सिल्हाटी, स./लोहारा

तेरी ही सुरत सा लग रहा था..

काली  घटा देखी तेरे बालो में सोने सा बदन चमक रहा था । जो चाँद देखा मैंने आसमां  पे तेरी ही सूरत सा लग रहा था ।। हिरणी से चंचल है जलवे तेरे आँखो से नशा छलक रहा था। पैरो की पड़ती ऐस...